ज़ाहिर तो यह किया जा रहा है कि यह प्रदर्शन पुलिस के हाथों इथोपियाई मूल के 19 वर्षीय युवा की हत्या के कारण हुए हैं लेकिन इस इलाक़े में बसे इथोपियाई मूल के लोगों के प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है बल्कि इसके बुनियादी कारण हैं। आंकड़ों के अनुसार अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में 1 लाख 30 हज़ार इथोपियाई मूल के यहूदी आबाद हैं जिनमें से 82 हज़ार वह हैं जो इस्राईल से बाहर पैदा हुए। इन लोगों को इस्राईली सरकार दुनिया के अन्य क्षेत्रों में बसे यहूदियों को फ़िलिस्तीन लाने की नीति के तहत इस इलाक़े में लेकर आई है। लेकिन यह आबादी अन्य लोगों से पूर्णतः भिन्न है।
फ़लाशा यहूदी कहे जाने वाले इन यहूदियों को ज़ायोनी सरकार तीसरे दर्जे का नागरिक समझती है इसीलिए उनके साथ बड़ा भेदभाव किया जाता है और उनके इलाक़ों में भारी ग़रीबी यहां तक कि हिंसक घटनाएं देखने में आती हैं। ज़ायोनी सरकार सब्ज़ बाग़ दिखा कर दुनिया के अनेक इलाक़ों में बसे यहूदियों को अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन लेकर आती है। इथोपिया से आने वाले यहूदियों को पूर्वी क्षेत्रों में बसाया गया है। पश्चिमी इलाक़ों में रहने वाले यहूदियों की तुलना में पूर्वी इलाक़ों में बसाए गए यहूदियों की स्थिति काफ़ी ख़राब है। ज़ायोनी प्रधानमंत्री के मंत्रीमंडल के ख़िलाफ़ इथोपियाई मूल के यहूदियों के प्रदर्शन की वजह यही भेदभाव है।
दूसरा कारण इथोपियाई यहूदियों में फैली ग़रीबी है। उनके बीच ग़रीबी अन्य इलाक़ों की तुलना में साढ़े तीन गुना ज़्यादा है। मिस्र के फ़ीतो अख़बार ने इस बारे में एक रिपोर्ट में लिखा कि इथोपियाई मूल के यहूदियों में ग़रीबी की दर 51 दशमलव 7 प्रतिशत है जबिक अन्य इलाक़ों में यह दर 15 दशमलव 8 प्रतिशत है।
इथोपियाई यहूदियों की ग़रीबी की यह हालात है कि बड़ी संख्या में उनके बच्चे शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं।
इसके अलावा इथोपियाई मूल के यहूदियों के साथ पुलिस का कठोर और हिंसक बर्ताव भी प्रदर्शनों का एक मूल कारण है। उनका कहना है कि पुलिस बिना प्रमाण और दस्तावेज़ के भी उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही करती है और उनसे हिंसक बर्ताव किया जाता है। हैफा में प्रदर्शन 19 साल के युवा की हत्या के विरोध में भड़के। एक इस्राईली सैनिक ने रविवार को हैफ़ा नगर में 19 साल के सोलोमोन तक़ा नामक युवा को गोली मार कर ढेर कर दिया जबकि सैनिक को उससे किसी तरह का कोई ख़तरा नहीं था।
जनवरी महीने में भी इथोपियाई मूल के यहूदियों ने एक युवा पर पुलिस की फ़ायरिंग के विरोध में प्रदर्शन किए थे। जिस सैनिक ने इथोपियाई यहूदी की हत्या की उसके खिलाफ़ अदालती कार्यवाही में भी भेदभाव किया जा रहा है। हमलावर सुरक्षा कर्मियों को बड़ी आसानी से बरी कर दिया हाता है।
नेतनयाहू अपना नया मंत्रिमंडल बनाने में असफल रहे हैं और अधूरे मंत्रिमंडल की मदद से सरकार चला रहे हैं। जबकि इस बीच सितम्बर में होने जा रहे संसदीय चुनाव के लिए भी उनके पास कुछ नहीं है।