4 जुलाई 2019 - 18:17
ऐसा क्या है रूस के एस-400 में कि भारत, चीन और तुर्की जैसे देश अमरीका की धमकियों के बावजूद इसके ख़रीदारों की क़तार में लगे हैं

पिछले महीने पूर्वी साइबेरिया में वोस्तोक-2018 युद्ध अभ्यास पिछले 30 वर्षों में रूस का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास था, जिसमें लगभग 3 लाख रूसी, चीनी और मंगोलियाई सैनिकों ने भाग लिया।

सिर्फ़ एक अभ्यास से कहीं अधिक, यह हथियारों और सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन था, जो तेल की आय के बाद रूस की आय का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।

वोस्तोक-2018 के दौरान, रूस ने सतह से हवा में मार करने वाले देश के सबसे आधुनिक और विश्व में डिमांड वाले हथियार एस-400 का प्रदर्शन किया।

इसकी क्षमताओं के कारण ही और अमरीका की नाराज़गी मोल लेकर तुर्की, भारत, चीन, क़तर और सऊदी अरब जैसे देश इसे ख़रीदने की क़तार में लगे हुए हैं।

जिस देश ने भी इसे ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है, उसे अमरीका और नाटो ने आर्थिक प्रतिबंधों लगाने या कूटनीतिक रिश्ते ख़राब होने की धमकी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि यह पुराने घटकों के बीच संभावित जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के हथियारों के हस्तांतरण और सैन्य मामलों के वरिष्ठ शोधकर्ता सीमन वेज़मैन का कहना है, एस-400 सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में से एक है, पश्चिम को भी जिसकी डिमांड करनी चाहिए।

इसके रडार और दूसरे सेंसर्स, इसी तरह से इसके मिसाइल एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं, रडार कम से कम 600 किलोमीटर तक निगरानी कर सकता है और इसके मिसाइल की रेंज 400 किलोमीटर है।

यह सटीक है और यह गुप्त लक्ष्यों समेत अधिक संख्या में संभावित लक्ष्यों को ट्रैक करके ध्वस्त कर सकता है।

इसकी दूसरी विशिष्टता इसका मॉड्यूलर सेटअप और उच्च गतिशीलता हैं, जिसका मतलब यह है कि इसे मिनटों में स्थापित किया जा सकता है और इससे फ़ायर करके तुरंत स्थानांतरित किया जा सकता है।

एक ही आकार के विभिन्न मिसाइलों को इसमें फ़िट किया जा सकता है। इसे लंबी दूरी, अर्ध लंबी दूरी, मध्यम दूरी और यहां तक कि कम दूरी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।