25 जून 2019 - 14:39
ईरानी सुप्रीम लीडर और विदेश मंत्री पर अमरीकी प्रतिबंध का अर्थ क्या है? क्या है ईरान की प्रतिक्रिया???

ईरान का मुक़ाबला करने में असहाय अमरीका ने तेहरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मुसवी ने अमरीका के नए प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट में लिखा, ईरान के सुप्रीम लीडर और देश की कूटनीति के कमांडर (विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़) पर व्यर्थ प्रतिबंध लगाने का मतलब है कि हताश अमरीकी सरकार के साथ कूटनीति का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया है।

ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका के नए प्रतिबंधों की घोषणा के साथ ही ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और ईरान पर हमले के कट्टर समर्थकों में से एक जॉन बोल्टन ने मंगलवार को कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प वार्ता के लिए तैयार हैं और ईरान को इस खुले दरवाज़े से गुज़रने की ज़रूरत है।

इसी के साथ बोल्टन ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए क्षेत्र में अमरीकी प्रतिनिधि काम कर रहे हैं, लेकिन इस्लामी गणतंत्र की ख़ामोशी कान फोड़ने वाली है।

बोल्टन अक़्ल से पैदल होने के साथ साथ शायद कानों से बहरे भी हैं, यही वजह है कि उन्हें ईरानी अधिकारियों की बहुत ही स्पष्ट शब्दों और ऊंची आवाज़ में दी जाने वाली वह चेतावनियां सुनाई नहीं दे रही हैं, जिसमें वह कह चुके हैं कि अमरीका के साथ कोई वार्ता नहीं होगी और ईरान हर मोर्चे पर अमरीका का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है।

वास्तव में ईरान द्वारा अपने आधुनिकतम ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद से ट्रम्प प्रशासन बौखला गया है और एक महा-शक्ति के रूप में विश्व स्तर पर अमरीका की साख बुरी तरह से ख़राब हुई है।

ड्रोन के मार गिराए जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का लहजा पूर्ण रूप से बदल गया था और वह धमकी के स्थान पर ईरान की प्रशंसा करने लगे थे। हालांकि ईरानी जनरलों ने अमरीका को चेता दिया था कि अगर उसने भविष्य में उसकी वायु सीमा का उल्लंघन किया तो उसके विमानों को बख़्शा नहीं जाएगा।

फ़ार्स खाड़ी में ईरान के मुक़ाबले में असहाय नज़र आने वाले अमरीका ने फिर वही प्रतिबंधों का अपना असफल हथकंडा अपनाया है और इसी हफ़्ते ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई पर प्रतिबंध का कोई मतलब नहीं है और यह प्रतिबंध पागलनपन के अलावा कुछ नहीं है।

वरिष्ठ नेता ने पिछले 30 वर्षों से विदेश की कोई यात्रा नहीं की है। अंतिम बार 1989 में जब वे ईरान के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने चीन की यात्रा की थी।

ईरानी विदेश मंत्री ने अपना पूरा जीवन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में गुज़ारा है। वे संयुक्त राष्ट्र में काफ़ी लम्बे समय तक काम कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह ईरान की कूटनीति का चेहरा समझे जाते हैं।