13 जून 2019 - 19:18
ट्रंप संदेशों के आदान-प्रदान के लाएक नहींः वरिष्ठ नेता

जापान के प्रधानमंत्री शिन्ज़ो आबे बुधवार को एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे।

जापान के प्रधानमंत्री ने सबसे पहले ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी से भेंटवार्ता की और उसके बाद गुरूवार को उन्होंने ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनई से भेंट की।

वरिष्ठ नेता ने इस भेंट में कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान अमेरिका पर विश्वास नहीं रखता है और परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में इससे पहले अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता के कटु अनुभव की हम पुनरावृत्ति नहीं करेंगे क्योंकि कोई भी स्वतंत्र व बुद्धिमान राष्ट्र दबाव में वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा।

इस भेंट में जापान के प्रधानमंत्री ने सबसे पहले इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अमेरिका के राष्ट्रपति के संदेश को आपकी सेवा में पहुंचाना चाहता हूं।

इस पर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने जापान के प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि हमें आपकी सद्भावना में कोई संदेह नहीं हैं परंतु आपने जो कुछ अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से कहा तो मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं ट्रंप को संदेश के आदान- प्रदान के लाएक़ नहीं समझता और उनके लिए न तो मेरे पास कोई जवाब है और न जवाब दूंगा।

जापान के प्रधानमंत्री ने जब यह कहा कि ट्रंप ने कहा है कि वह ईरानी सरकार को नहीं बदलना चाहते हैं तो वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि अमेरिका के साथ हमारी समस्या सरकार बदलने के विषय को लेकर नहीं है क्योंकि अगर वे ऐसा करना भी चाहते हों तो भी नहीं कर सकते।

जैसाकि गत चालिस वर्षों के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्राध्यक्षों ने इस्लामी गणतंत्र ईरान को खत्म करने का प्रयास किया परंतु वे ऐसा न कर सके।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने संबोधन के एक अन्य भाग में कहा कि हम परमाणु हथियारों के विरोधी हैं और परमाणु हथियारों का बनाना हराम है इस संबंध में हमारा फतवा भी है परंतु यह जान लीजिये कि अगर हम परमाणु हथियार बनाना चाहें तो अमेरिका कुछ भी नहीं कर सकता और अमेरिका परमाणु हथियारों के निर्माण की अनुमति न दे तब भी कोई समस्या उपन्न नहीं होगी।

वरिष्ठ नेता ने परमाणु समझौते के संबंध में अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता की ओर संकेत किया और कहा कि परमाणु समझौते के बाद जिसने इस समझौते का सबसे पहले उल्लंघन किया वह स्वयं ट्रंप थे, यह वही हैं जिन्होंने ईरान के साथ वार्ता का संदेश भेजा है।

साथ ही वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमेरिका से वार्ता ईरान की प्रगति का कारण नहीं बनेगी। वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि ईश्वर की कृपा से हम अमेरिका से वार्ता किये बिना और प्रतिबंधों के होने के बावजूद प्रगति करेंगे।