अतवान ने रायुल यौम समाचार पत्र में अपने संपादकीय मे लिखा है कि ईरानी ऐसे सच्चे मर्द हैं जो न केवल यह कि अमरीका की शर्तों के सामने नहीं झुके हैं और न आगे झुकेंगे बल्कि उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया है कि वाॅशिंग्टन, तेहरान से वार्ता के लिए भीख मांग रहा है। संयुक्त अरब इमारात, सऊदी अरब और नाॅर्वे ने, जिनके ऑयल टैंकर अलफ़ुजैरा में हुए धमाके में तबाह हो गए, इस धमाके के एक महीने बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद को आरंभिक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में जो ध्यान योग्य बात है वह यह है कि इन देशों ने ईरान की ओर कोई संकेत नहीं किया है बल्कि यह कहा है कि कुछ अज्ञात पक्षों ने यह हमला किया है। उन्होंने ईरान का नाम क्यों नहीं लिया है? उन्होंने कहा है कि केवल कोई देश ही इस तरह का हमला कर सकता है। यह देश अज्ञात क्यों है? अमरीकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने दावा किया था कि यह हमला ईरान ने किया है। बोलटन ने भी कहा था कि शक की सूई सिर्फ़ ईरान की तरफ़ है। तो फिर ये देश ईरान का नाम लेने से डर क्यों गए? उनके डरने के दो कारण हैंः
- उनके पास पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं क्योंकि यह कार्यवाही बहुत सटीक ढंग से की गई थी। अगर वे ऑयल टैंकर पर हमला करना चाहेंगे तो फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में संकट खड़ा हो जाएगा। आप सोचिए कि चार दैत्याकार ऑयल टैंकर धमाके से उड़ गए। ग़ोताख़ोर उन ऑयल टैंकरों तक पहुंचे और उनमें बारूदी सुरंगें लगाईं और उन्हें उड़ा दिया। उन ग़ोताख़ोरों ने जान बूझ कर उन ऑयल टैंकरों को नहीं उड़ाया जिन पर तेल नहीं लदा था। उन्होंने जान बूझ कर इस तरह हमला किया कि ऑयल टैंकर से तेल बाहर न निकले। यह सब संदेश है। ग़ोताख़ोरों ने यह हमला किया और स्पीड बोट्स से वापस चले गए और कोई भी उन्हें देख नहीं सका। आप, जो अरबों डाॅलर के रडार ख़रीदने और सूचनाएं प्राप्त करने पर ख़र्च करते हैं किस प्रकार इन स्पीड बोट्स को नहीं देख सके? इन हथियारों, रडारों और अरबों डाॅलर व्यर्थ में ख़र्च करने का क्या फ़ायदा है।
- मेरे विचार में दूसरा कारण यह है कि अगर वे यह कहें कि ईरान ने यह हमला किया तो इस स्थिति में अमरीका को जवाब देना पड़ेगा लेकिन अमरीका जवाब नहीं देना चाहता क्योंकि वह आतंकित हो चुका है। अगर अमरीका जवाब देता है तो इस स्थिति में उसके सभी विमान, पानी के जहाज़ और ऑयल टैंकर तबाह हो जाएंगे। यह एक संदेश था और वह यह कि हम चार ऑयल टैंकर्स तक पहुंच गए हैं और बात ख़त्म। फ़ार्स की खाड़ी का पूरा क्षेत्र ऑयल टैंकर्स से भरा हुआ है। अगर वे हुर्मुज़ स्ट्रेट को बंद न करें तो ऑयल टैंकर्स को तबाह कर देंगे। तो इस स्थिति में अमरीका क्या करेगा? अमरीकी डर गए हैं। अब अमरीका, ईरान से वार्ता के लिए भिखमंगाई कर रहा है। ईरानी मर्द हैं, वे कहते हैं कि हम खिलवाड़ बन कर तुमसे बात नहीं करना चाहते। इसके लिए पहले प्रतिबंध समाप्त करो। इसके अलावा हम बैलिस्टिक मीज़ाइलों के बारे में किसी भी स्थिति में बात नहीं करेंगे और अंततः यह कि अमरीका को परमाणु समझौते में लौटना होगा। जो शक्तिशाली होता है वह अपनी बात मनवाता है, लेकिन हम अरब आज्ञापालक और पिट्ठू हैं।
यह बड़ी विडंबना है जिसका हम अरबों को सामना है। ईरानियों ने विश्व क़ुद्स दिवस मनाया और इस दिन दसियों लाख लोगों ने प्रदर्शन किए लेकिन हमने बैतुल मुक़द्दस और फ़िलिस्तीन को भुला दिया है। अरब शासक कहते हैं कि विवाद, फ़िलिस्तीनियों व इस्राईल के बीच है। वे डील ऑफ़ द सेंचुरी को लागू करने के लिए लामबंद हो गए हैं और इस संबंध में मनामा में बैठक आयोजित करना चाहते हैं। अलबत्ता अब उनकी समझ में आ गया है कि कोई भी इस बैठक में भाग नहीं लेगा। वे समझ गए हैं कि इससे पहले कि वे बहरैन में इकट्ठा हों, प्रतिरोध के मोर्चे ने इस डील को तबाह कर दिया है। यह मर्दानगी है। प्रतिरोध के मोर्चे ने डील ऑफ़ द सेंचुरी को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। प्रतिरोध के मोर्चे के मीज़ाइलों और विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण ने इस डील को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।