(ABNA24.com) ईरान ने परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में परमाणु समझौते के कुछ वचनों पर अमल करना रोक दिया है और यूरोप को 60 दिन का समय दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते में अपने वचनों पर अमल करे।
जर्मनी के विदेशमंत्री हाइको जोसेफ़ मास ईरानी अधिकारियों से भेंटवार्ता के लक्ष्य से तेहरान आये हैं। राजनीतिक टीकाकारों के अनुसार तेहरान में होने वाली वार्ता के दौरान दो विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
पहली बात यह है कि अमेरिका ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालने की चेष्टा है और इस संबंध में वह जो भी कर सकता है वह कर रहा है और यूरोप को चाहिये कि वह इस संबंध में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करे और दूसरी बात है कि परमाणु समझौते में जो असमंजस की स्थिति बनी हुई है यूरोप को चाहिये कि उसके बारे में भी अपने दृष्टिकोण को साफ करे।
यूरोप हमेशा यह कहता है कि परमाणु समझौते से अमेरिका के निकल जाने से ईरान को जो आर्थिक क्षति हो रही है वह उसकी भरपाई के लिए आर्थिक व्यवस्था इंस्टेक्स को आंरभ करने के प्रयास में है।
इसी कारण जर्मनी के विदेशमंत्री के साथ इंसटेक्स के प्रबंधक भी तेहरान आये हैं। साथ ही यूरोपीय पक्ष यह दिखाने के प्रयास में है कि परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में ईरान ने अपने वचनों के जिस भाग पर अमल करना रोक दिया है उससे यूरोप चिंतित है।
एक महीने पहले से ईरान ने परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में परमाणु समझौते के कुछ वचनों पर अमल करना रोक दिया है और यूरोप को 60 दिन का समय दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते में अपने वचनों पर अमल करे।
इस समय प्रतीत यह हो रहा है कि यूरोपीय और एशियाई अधिकारी परमाणु समझौते को लेकर उत्पन्न तनावों व चिंताओं को कम करने और आर्थिक व्यवस्था इंस्टेक्स को क्रियान्वित करने के प्रयास में हैं। जर्मनी के विदेशमंत्री जो तेहरान की यात्रा पर आये हैं और जापान के प्रधान मंत्री की निकट भविष्य में होने वाली तेहरान यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
दो सप्ताह पहले जर्मनी के विदेशमंत्री ने इस देश की संसद में परमाण समझौते को दूसरे विषयों से जोड़ते हुए कहा था कि इस समझौते की विफलता के लिए इस पर हस्ताक्षर करने वाले दूसरे सदस्य देश भी ज़िम्मेदार हैं।
साथ ही उन्होंने बल देकर कहा था कि परमाणु समझौते के प्रति वचनबद्ध रहना केवल यूरोप की ज़िम्मेदारी नहीं है बल्कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 के अनुसार सुरक्षा परिषद के समस्त सदस्य देशों की ज़िम्मेदारी है कि वे हर संभव मार्ग से इस समझौते का समर्थन करें।
बहरहाल विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि यूरोपीय पक्ष इस लाएक नहीं है कि वह ईरान की आलोचना करे और उस विषय को परमाणु समझौते से जोड़े जिनका इस विषय से संबंध भी नहीं है और अमेरिका की ओर से वार्ता का राग अलापना मात्र दिखावा है।
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12 जून 2019 - 06:57
समाचार कोड: 950029
ईरान ने परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में परमाणु समझौते के कुछ वचनों पर अमल करना रोक दिया है और यूरोप को 60 दिन का समय दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते में अपने वचनों पर अमल करे।