ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि ईरानी अधिकारी और राष्ट्र अमेरिकी राष्ट्रपति की राजनीतिक चालाकियों के धोखे में नहीं आयेगें।
वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने मंगलवार को इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की 30वीं बरसी के अवसर कहा कि दुश्मन के षडयंत्र विभिन्न प्रकार हैं कभी धमकी तो कभी प्रलोभन और अमेरिकियों को निकट आने की अनुमति नहीं देना चाहिये, उनके कदम अशुभ हैं और जहां भी उन्होंने कदम रखा वहां युद्ध, हत्या, बुराई, शोषण और साम्राज्यवाद आया।
वरिष्ठ नेता ने प्रतिरोध के विचार के प्रभावी होने के बारे में कहा कि प्रतिरोध का खर्च है परंतु नतमस्तक होने का खर्च प्रतिरोध के खर्च से कहीं अधिक है।
ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध और होशियारी से क्रांति बाकी है और अब वह पांचवें दशक में दाखिल हो गयी है। इस प्रतिरोध का स्रोत स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के विचार हैं और आज वह निवारक क्षमता की सतह पर पहुंच गया है और ईरान अधिक से अधिक अमेरिकी दबावों के मुकाबले में मज़बूती व अदम्य साहस के साथ डटा हुआ है और उसने दुश्मन को पीछे धकेल दिया है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रतिरोध ने सदैव दुश्मनों की चालों और षडयंत्रों को विफल बनाया है और इस्लामी क्रांति के गत चालीस वर्ष के इतिहास में इसके बहुत अधिक चिन्हों को देखा जा सकता है।
इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से अमेरिका की ईरान से दुश्मनी आरंभ हुई है और आज तक जारी है पर अमेरिका को ईरान के मुकाबले में सदैव मुंह की खानी पड़ी है।
प्रतिरोध की कीमत चुकानी पड़ती है परंतु जो राष्ट्र स्वतंत्र और शक्तिशाली होना व रहना चाहता है उसके लिए यही तार्किक मार्ग है। प्रतिरोध के इसी अर्थ ने दुश्मनों के हर प्रकार के षडयंत्र के मुकाबले में ईरानी राष्ट्र को विजय दिलाई है और आज ईरानी राष्ट्र का प्रतिरोध वहां पहुंच गया है कि अमेरिका के अधिक से अधिक आर्थिक दबाव का भी कोई लाभ नहीं होगा।
अमेरिका की हर प्रकार की धमकी के मुकाबले में ईरान के तार्किक और सिद्धांतिक प्रतिरोध ने तेहरान के संबंध में अमेरिकी अधिकारियों को अपने दृष्टिकोणों को परिवर्तित करने पर बाध्य कर दिया है और ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रतिरोध का विचार एक राष्ट्र का सबसे मजबूत व शक्तिशाली हथियार है।