अमरीकी विदेशमंत्री ने बर्न में अपने स्विस समकक्ष से भेंट में कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने गत कुछ दिनों के दौरान, ईरानियों के साथ वार्ता में अपनी रुचि प्रकट की है अलबत्ता इस अवसर पर भी अमरीकी विदेशमंत्री ईरान पर आरोप लगाने से नहीं चूके। अमरीकी विदेशमंत्री ने एक साल पहले, ईरान से वार्ता के लिए बारह शर्त पेश की थी जिसमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना और क्षेत्र में प्रतिरोध मोर्चे के समर्थन को बंद करना शामिल था। उस समय ट्रम्प सरकार को आशा थी कि परमाणु समझौते से निकलने और प्रतिबंध फिर से लगाने की धमकी की वजह से ईरान, अमरीका के साथ परमाणु तथा अन्य विषयों पर वार्ता के लिए तैयार हो जाएगा लेकिन गत एक वर्ष के दौरान अमरीका के अत्याधिक दबाव के बावजूद ईरान के प्रतिरोध ने यह सिद्ध कर दिया कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, दबाव और धमकी में आकर, समझौता उल्लंघन करने वाले और वचन तोड़ने वाले अमरीका से वार्ता नहीं करेगा।
अब जब कि ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की नीति लागू करने, आईआरजीसी को आंतकवादी घोषित करने और विमान वाहक पोत और बी-52 बमवर्षक विमान भेजकर ईरान पर अमरीका ने अधिकतम दबाव डाल लिया है तो उसके पास, सम्मानजनक रूप से वार्ता या युद्ध के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। यह एेसी स्थिति में है कि अमरीका के अत्याधिक चरमपंथी धड़े से संबंध रखने वाले भी ईरान पर आक्रमण के भयानक परिणामों की ओर से सचेत कर रहे हैं यहां तक कि ट्रम्प तक ने भी ईरान से टकराव से बचने की बारम्बार बात की है। यहां तक कि रिपब्लिकन सीनेटर, रिचर्ड ब्लैक ने ट्रम्प के नाम एक पत्रि में लिखा कि हमारी जनता, युद्ध से थक चुकी है, ईरान के खिलाफ युद्ध को जनता का समर्थन प्राप्त नहीं है, मुझे चिंता है कि अगर हम ईरान पर हमला करें तो कहीं रिपब्लिकन्स को सन 2020 के चुनाव में एतिहासिक पराजय न हो जाए। इन हालात में अब अमरीकी अधिकारियों के पास ईरान के साथ वार्ता के प्रस्ताव के अलावा कोई विकल्प नहीं है लेकिन ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने हालिया सप्ताहों में बारम्बार वार्ता से इन्कार किया है जिसके बाद एेसा लगता है कि अमरीकी अधिकारी, ईरान के प्रति अधिक सर्तकता के साथ व्यवहार अपना रहे हैं किंतु यह एक वास्तविकता है कि ईरान के लिए महत्वपूर्ण, अमरीकी स्वर में बदलाव नहीं बल्कि व्यवहार में बदलाव है जब तक अमरीका ईरान पर अधिकतम दबाव की अपनी नीति, में पुनर्विचार में रुचि प्रकट नहीं करेगा तब तक, ईरान से वार्ता की जो बात अमरीकी विदेशमंत्री कर रहे हैं, वह संभव नहीं होगी।