1 जून 2019 - 14:36
अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी न मारो, राय अलयौम की अरब देशों को सलाह

डील आफ़ सेन्चुरी के बारे में जून के अंत में होने वाली बहरैन बैठक संभव है कि कुछ देश के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक आत्महत्या होगी।

राय अलयौम की रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेयर्ड कूश्नर सहित कुछ अमरीकी कूटनयिकों की क्षेत्रीय यात्राओं के कारण यह बात मन में जगह बना गयी है कि बहरैन बैठक का फ़ैसला जो कि जून महीने के अंत में आयोजित होने वाली है, कुछ दशकों तक मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीक़ी देशों और इनके राष्ट्रों को प्रभावित कर सकता है और इससे अरब देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे।

राय अलयौम आगे लिखता है कि संभव है कि मनाना बैठक कुछ देशों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक आत्महत्या हो सकती है।

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र में अहमद महमूद सईद अपने लेख में लिखते हैं कि वर्तमान समय अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेयर्ड कूश्नर अपने दोस्तों के साथ पहले से ही घोषित लक्ष्यों के लिए अर्थात आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और विकास तक पहुंच के लिए क्षेत्रीय दौरे पर हैं जबकि क्षेत्रीय देशों के अधिकारी और नागरिक विशेषकर फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को यह पता है कि इस्राईल की नज़र में मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीनी मुद्दे और उमंगों की तबाही है।

जून 2019 के अंत में बहरैन में होने वाली बैठक में उपस्थिति के लिए फ़िलिस्तीनी प्रशासन का विरोध और इस बैठक में भाग लेने के लिए बहुत से देशों में पाई जाने वाली शंकाओं ने यह बात मन में बिठा दी है कि न केवल यह कि वास्तविक चिंता है बल्कि बहुत महत्वपूर्ण बात है और इस बैठक में लिखा जाने वाला फ़ैसला संभव है कि मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीक़ी देशों के लिए कई दशकों तक नकारात्मक प्रभाव लिए रहे, कितना अच्छा होता कि यह देश फ़ैसले से पीछे हट जाते, यहां तक यह बैठक, कुछ देशों के लिए राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक आत्महत्या का कारण बन सकती है।

संभव है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दामाद और उनके सलाहकार जेयर्ड कूश्नर के साथ जाने वाले प्रतिनिधि मंडल का दौरा इस्राईल में समाप्त हो जाए क्योंकि जो कुछ होना है उसका फ़ैसला पहले से ही लिया जा चुका है।

डील आफ़ सेन्चुरी क्या है?

जेयर्ड कूश्नर ने पिछले दो वर्षों के दौरान मध्यपूर्व विशेषकर फ़िलिस्तीन- इस्राईल तनाव पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रखा। कूश्नर फ़िलिस्तीन-इस्राईल तनाव के लिए डील आफ़ सेन्चुरी योजना पर काम कर रहे हैं और इसे लागू करना चाहते हैं किन्तु दो साल गुज़रने के बावजूद अब तक इसके लागू होने की आधिकारिक घोषणा नहीं कर सके हैं।

योजना का एलान तो नहीं किया गया लेकिन इसके बारे में जानकारियां जान बूझ कर लीक की गईं ताकि प्रतिक्रियाओं का अंदाज़ा लगाया जा सके। एक जानकारी यह लीक होकर आई कि इस योजना के तहत बैतुल मुक़द्दस को हमेशा के लिए इस्राईल की राजधानी बना दिया जाएगा और अमरीका ने बाक़ायदा इसका एलान भी कर दिया और अपना दूतावास तेल अबीब से बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित कर दिया।

एक जानकारी यह लीक हुई कि पश्चिमी तट के इलाक़े को दो भागों में बांट दिया जाएगा एक भाग जार्डन के तहत संचालित होगा और दूसरा भाग फ़िलिस्तीनियों के पास रहेगा। यह जानकारी भी लीक की गई कि जो फ़िलिस्तीनी अलग अलग देशों में या फ़िलिस्तीन के भीतर शरणार्थी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं उन्हें अपने घर वापस लौटने के अधिकार से हमेशा के लिए वंचित कर दिया जाएगा क्योंकि उनके इलाक़ों पर ज़ायोनी शासन ने ग़ैर क़ानूनी रूप से बस्तियों का निर्माण करके यहूदियों को बसा दिया है।

यहां पर यह कहा जा सकता है कि इस योजना के लागू न हो पाने के कुछ कारण है। न केवल प्रतिरोधकर्ता गुट बल्कि स्वयं फ़िलिस्तीनी प्रशासन भी इस योजना का विरोधी है और यही कारण है कि फ़िलिस्तीनी प्रशासन और वाशिंग्टन के संबंध टूट गये हैं।इस्लामी जगत का आम जनमत भी इस योजना का विरोधी है क्योंकि यह योजना इस्राईली इच्छाओं और उसके हितों को पूरा करती है, यही कारण है कि इस्राईल से संबंधों को सामान्य करने के बारे में अरब दुनिया में बहुत गंभीर मतभेद पाए जाते हैं। इन हालात के दृष्टिगत वर्तमान समय में कि जब तय यह था कि डील आफ़ सेन्चुरी योजना को जनवरी या उसके बाद फ़रवरी 2019 तक पेश कर दिया जाएगा किन्तु इन दोनों महीनों में न केवल यह कि योजना पेश नहीं हुई बल्कि इसको कई महीने के लिए टाल दिया गया है।