हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में कहा कि स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने रमज़ान के पवित्र महीने के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस का नाम देकर इस मामले को अमर बना दिया और अब कभी फ़िलिस्तीन समस्या को भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि आज फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध और इंतेफ़ाज़ा आंदोलन अतिग्रहित क्षेत्रों के हर स्थान तक पहुंच चुका है, कहा कि प्रतिरोध का मोर्चा ज़ायोनियों और अमरीका, सऊदी अरब व संयुक्त अरब इमारात के निंदनीय त्रिकोण और उनके समर्थकों के भय का कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सदी, दबाए व कुचले गए लोगों की विजय की सदी है और इस्लामी क्रांति केवल ईरान से विशेष नहीं है और सभी मुसलमान इस्लामी क्रांति के झंडे तले आ जाएंगे।
नमाज़े जुमा के ख़ुतबों से पहले ईरान के संसद सभापति ने भी अपने भाषण में कहा कि अमरीका द्वारा बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार करना, सभी मुसलमानों का अपमान था क्योंकि बैतुल मुक़द्दस मुसलमानों का पहला क़िब्ला और उनके लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। उन्होंने गोलान को ज़ायोनी शासन का भाग बताने के अमरीकी क़दम की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों में अमरीका की नीति मुसलमानों का अनादर करना, उन पर दबाव डालना और उनके स्रोतों को लूटना है।