हालांकि अमरीकी राष्ट्रपित डोनल्ड ट्रम्प कई बार यह घोषणा कर चुके हैं कि वाशिंगटन, तेहरान का साथ युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव में वृद्धि के बीच ट्रम्प प्रशासन द्वारा मध्यपूर्व में सैन्य गतिविधियों में वृद्धि के कारण, यह आशंका पाई जाती है कि कहीं यह तनाव किसी भी समय युद्ध में नहीं बदल जाए।
इस बीच, अमरीका के संयुक्त चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के प्रमुख ने कहा है कि युद्ध के समर्थन में उठने वाली आवाज़ें उन्हें प्रभावित नहीं कर सकेंगी कि वह ट्रम्प प्रशासन को ईरान के साथ युद्ध के बारे में क्या सलाह देने वाले हैं।
बुधवार को वाशिंगटन में ब्रूकिंग इंस्टिट्यूट में बात करते हुए जनरल जोज़ेफ़ डनफ़ोर्ड ने कहा, ईरान के साथ युद्ध के बारे में उनकी सिफ़ारिशें पूर्ण रूप से ख़ुफ़िया विश्लेषण पर आधारित होंगी।
डनफ़ोर्ड से जब पूछा गया कि क्या कुछ लोग चाहते हैं कि क्या अमरीका को इस वक़्त कुछ करना चाहिए? उन्होंने कहा, इस तरह की अटकलें तो हैं, लेकिन मैं आपको गारंटी देता हूं कि मैं जो सैन्य सलाह देने जा रहा हूं, उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।
डनफ़ोर्ड संयुक्त चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष या अमरीकी सेना प्रमुख के रूप में अमरीकी सेना में सबसे ऊंचे पद पर आसीन हैं।
वे अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और कांग्रेस को सैन्य मामलो में सलाह भी देते हैं, जो युद्ध में जाने के लिए अंतिम फ़ैसला लेते हैं।
डनफ़ोर्ड अच्छी तरह से जानते हैं कि ईरान के साथ युद्ध का क्या मतलब है और इस युद्ध के कितने भयानक परिणाम होंगे।
उनका कहना है कि मैं इस युद्ध के परिणामों से अच्छी तरह अवगत हूं और इस संबंध में सलाह देने की पूरी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करता हूं।
डनफ़ोर्ड ने यह बात ऐसी हालत में कही है कि जब अमरीकी अधिकारियों ने मई के शुरू में दावा किया था कि ईरान मध्यपूर्व में अमरीकी सैनिकों पर महले की तैयारी कर रहा है।
उसके बाद, वाशिंगटन ने फ़ार्स खाड़ी की ओर विमान वाहक युद्धपोत और बमवर्षक रवाना किए थे और क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि की घोषणा की थी।
डनफ़ोर्ड का कहना है कि ईरान की ओर से अमरीका के लिए सैन्य ख़तरा कोई नई बात नहीं है। लेकिन क्षेत्र में हमारी ताज़ा सैन्य गतिविधियों का मक़सद यह बताना है कि अमरीकी सेना रक्षात्मक क़दम उठाने की शक्ति रखती है।
ग़ौरतलब है कि ईरानी अधिकारी कई बार अमरीका को यह चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उसने तेहरान के हितों को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की तो ईरान उसका मुंह तोड़ जवाब देगा।
तेहरान का यह भी कहना है कि वह अमरीका के साथ युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर युद्ध से पीछे भी नहीं हटेगा।