सोमवार को इराक़ के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मुक़तदा सद्र ने चेतावनी देते हुए कहा, इस युद्ध से इराक़ के अंत की शुरूआत हो जाएगी, हमें शांति और पुनर्निर्माण की ज़रूरत है।
इराक़ में सद्र आंदोलन के प्रमुख ने ईरान और अमरीका के बीच किसी भी संभावित युद्ध के इराक़ पर पड़ने वाले भयानक प्रभावों के प्रति सचेत किया।
सद्र का कहना था कि अगर कोई राजनीतिक दल इस तरह के युद्ध की वकालत करता है तो वह इराक़ी जनता का दुश्मन है, क्योंकि इस युद्ध में इराक़ युद्ध के दोनों पक्षों के रण क्षेत्र में बदल जाएगा।
पिछले साल हुए संसदीय चुनावों में सद्र के राजनीतिक गठबंधन सायरून ने सबसे अधिक सीटें जीती थीं।
मुक़तदा सद्र इराक़ पर अमरीका के अतिक्रमण के मुखर विरोधी रहे हैं और उनके स्वयं सेवी बलों मेहदी आर्मी ने अमरीकी सैनिकों से लोहा लिया था।
इराक़ के एक अन्य वरिष्ठ नेता हादी अल-आमेरी ने भी कहा है कि अगर युद्ध भड़कता है तो यह सबकुछ नष्ट कर देगा, इसलिए इराक़ी जनता को एकजुट होकर इस युद्ध का विरोध करना चाहिए।
यह चेतावनियां इराक़ी राजधानी बग़दाद के ग्रीन ज़ोन में अमरीकी दूतावास के निकट रॉकेट फ़ायर किए जाने के बाद सामने आई हैं।
इराक़ी अधिकारियों और स्वयं सेवी बलों ने तुरंत इस रॉकेट हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इसकी निंदा की और आशंका जताई की कहीं यह हमला ईरान और अमरीका के बीच लड़ाई भड़काने की कोई साज़िश तो नहीं।
इराक़ी हिज़्बुल्लाह संगठन के एक प्रवक्ता ने अमरीकी दूतावास पर रॉकेट हमले को संदिग्ध बताया और इसके लिए इस्राईल या सऊदी अरब जैसे किसी तीसरे पक्ष ज़िम्मेदार बताया, जो ईरान और अमरीका के बीच युद्ध भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
ग़ौरतलब है 2 मई को ईरान से तेल आयात करने वाले देशों को अमरीकी प्रतिबंधों से मिली छूट की समाप्ति के बाद से ईरान अमरीका के बीच तनाव अपने चरम पर है।
अमरीका ने अपना एक विमान वाहक युद्धपोत और बमवर्षक क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं, लेकिन साथ ही यह भी एलान किया है कि वाशिंगटन, तेहरान के साथ युद्ध नहीं चाहता है।
ईरानी अधिकारियों विशेष रूप से ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने भी एलान किया है कि दोनों देशों के बीच युद्ध नहीं होगा, लेकिन तेहरान वार्ता के लिए वाशिंगटन के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं करेगा।
इस दौरान, अमरीकी और ईरानी अधिकारियों के बीच ट्वीट वार जारी है, लेकिन दोनों ही देश तनाव को बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि सऊद अरब, संयुक्त अरब इमारात और इस्राईल इस तनाव को हवा देने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि यह तनाव युद्ध में बदल जाए, फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में घटने वाली हालिया कुछ घटनाओं से इसे साफ़ तौर से समझा जा सकता है।