19 मई 2019 - 13:10
क्या रक्षा उद्योग में अमरीका को पीछे छोड़ रहा है रूस, नैटो का सदस्य होने के बावजूद तुर्की को क्यों है रूसी मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्ट

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान का यह कहना कि वह रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदने के साथ ही अधिक आधुनिक मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम एस-500 का रूस के साथ मिलकर संयुक्त निर्माण भी करेगा, अमरीका के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं है।

अमरीका और तुर्की के बीच जिन मुद्दों को लेकर गहरे मतभेद हैं उनमें एक एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम का रूस और तुर्की के बीच होने वाला सौदा है। अमरीका इस सौदे का विरोधी है और उसका मानना है कि तुर्की नैटो सदस्य है तो उसे रूस से यह डिफ़ेन्स सिस्टम नहीं ख़रीदना चाहिए मगर तुर्की का तर्क यह है कि नैटो के दूसरे सदस्य देशों के पास रूसी मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम मौजूद हैं।

अमरीका की नाराज़गी इतनी बढ़ गई है कि उसने तुर्की को एफ़-35 युद्धक विमान की सप्लाई रोक देने का एलान कर दिया। ट्रम्प यह धमकी भी दे चुके हैं कि वह तुर्की की अर्थ व्यवस्था को निशाना बनाएंगे। मगर इसके बावजूद तुर्की ने न केवल यह कि एस-400 मिसाइल ढाल सिस्टम ख़रीदने का फ़ैसला नहीं बदला बल्कि रूस के साथ मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम के निर्माण में सहयोग की घोषणा भी कर दी है।

अमरीका का कहना है कि उसे इस बात की चिंता है कि यदि तुर्की ने एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीद लिया तो इसके माध्यम से एफ़-35 की तकनीकी जानकारियां रूस तक पहुंच सकती हैं और इससे एफ़-35 युद्धक विमानों की उपयोगिता सीमित हो सकती है। तुर्की कह रहा है कि उसने इस पहलू से व्यापक जांच करवा ली है जिसका यह नतीजा निकला कि एस-400 और एफ़-35 युद्धक विमानों के साथ प्रयोग में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी।

तुर्की को इस बात पर भी आपत्ति है कि अमरीका उसे पैट्रियट मिसाइल डिफेन्स सिस्टम तो देने को तैयार है लेकिन थाड मिसाइल सिस्टम देने के लिए कठोर शर्तें लगा रहा है जबकि पैट्रियट मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम की समस्या यह है कि वह सऊदी अरब में यमन के मिसाइल और ड्रोन हमलों के सामने नाकाम साबित हुआ है।

अमरीका का चिंता का विषय भी यही है कि यदि नैटो के सदस्य और अमरीका के घटक देश भी रूस से मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदेंगे तो पैट्रियट मिसाइल सिस्टम बनाने वाली उसकी रे थियोन कंपनी का भविष्य ख़तरे में पड़ जाएगा।

यह बात तब और गंभीर हो जाती है जब अमरीकी विमान निर्माण कंपनी बोइंग 737 मैक्स विमानों के संकट की वजह से बड़ी गंभीर परिस्थितियों की ओर बढ़ रही है।