16 मई 2019 - 19:21
अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब को करारा जवाब देकर क्या संदेश देना चाहा है?

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन द्वारा तीन बंदरगाहों से पीछे हट जाने के बावजूद विभिन्न क्षेत्रों पर सऊदी अरब के हमले जारी हैं।

सऊदी अरब की अगुवाई में हमला करने वाला गठबंधन यह दिखाना चाहता है कि अंसारुल्लाह कमज़ोर स्थिति में है इसलिए वह तीन बंदरगाहों से पीछे हटा है।

इस आधार पर वह यमन के अलहुदैदा सहित विभिन्न क्षेत्रों पर हमले व बमबारी कर रहा है जिसके परिणाम में उसके ताज़ा हमले में एक आम नागरिक हताहत और तीन महिलाओं सहित कई लोग घायल हो गये।

सऊदी अरब के इन हमलों पर यमनी सेना और स्वयं सेवी बल अंसारुल्लाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दिखाई है।

अंसारुल्लाह ने पिछले मंगलवार को ड्रोन से संयुक्त अरब इमारात के एक तेल पाइप लाइन और तेल प्रतिष्ठान पर हमला किया था। इसी संबंध में यमनी सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि सात ड्रोन विमानों से यंबअ क्षेत्र के निकट सऊदी अरब के एक तेल प्रतिष्ठा को निशाना बनाया गया जिसके बाद तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गयी।

इसी बीच यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने सऊदी अरब के जीज़ान क्षेत्र में स्थित "अस्सलब" सैनिक छावनी पर ज़िलज़ाल मिसाइल से हमला किया जिसमें कई सऊदी सैनिक हताहत व घायल हो गये।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुस्सलाम ने कहा है कि हम एक स्ट्रैटेजिक स्थिति में दाखिल हो गये हैं और सऊदी दुश्मन के खिलाफ अपने हमलों के नये चरण को आरंभ करेंगे।

सऊदी अरब के पाश्विक हमलों के जवाब में अंसारुल्लाह आंदोलन के हमलों के कुछ महत्वपूर्ण संदेश हैं।

पहला संदेश यह है कि अंसारुल्लाह जो तीन बंदरगाहों से पीछे हटा है तो उसके इस कार्य को अंसारुल्लाह की कमज़ोरी न समझा जाये बल्कि अंसारुल्लाह ने यमन में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए सद्भावना का परिचय दिया है।

दूसरा संदेश यह है कि अंसारुल्लाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दिखाकर अपनी शक्ति दिखा दी। साथ ही उसने अपने हमलों से यह दिखा दिया है कि वह सऊदी अरब को आघात पहुंचा सकता है और ऐसा नहीं हो सकता कि सऊदी अरब हमला करे और उसे इसका जवाब न मिले।

तीसरा संदेश यह है कि अंसारुल्लाह ने अपनी कार्यवाहियों से यह दर्शा दिया है कि अरब इमारात के अलफुजैरह हमले के लिए अंसारुल्लाह को ज़िम्मेदार बताना एक षडयंत्र है क्योंकि अंसारुल्लाह अपने सैनिक हमलों को गुप्त रूप से अंजाम नहीं देता और अगर वह किसी जगह या प्रतिष्ठान पर हमला करेगा तो स्पष्ट रूप से बयान करेगा।

बहरहाल जब तक सऊदी अरब को अमेरिका सहित कुछ शक्तियों का समर्थन व आशीर्वाद प्राप्त रहेगा तब तक यमन संकट के समाधान की आशा नहीं करनी चाहिये।