14 मई 2019 - 14:51
ईरान और भारत एक दूसरे की ज़रूरत

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान यूएई के तट पर घटी ऑयल टैंकरों से संबंधित हालिया घठना की ओर संकेत करते हुए इलाक़े में किसी भी संदिग्ध हरकत के प्रति चेतावनी दी है।

मंगलवार को नई दिल्ली में अपनी भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज से मुलाक़ात के बाद ज़रीफ़ ने कहा, इस मुलाक़ात में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और ट्रम्प प्रशासन में मौजूद कट्टरपंथियों की नीतियों के ख़तरों के बारे में बात हुई। इसी तरह हमारे इलाक़े में घटने वाली हालिया कुछ संदिग्ध घटनाओं के बारे में विचार विमर्श हुआ, जो इलाक़े में आग में घी डालने का काम कर सकती हैं।

ग़ौरतलब है कि यूएई की अल-फ़ुजैरा बंदरगाह में घटने वाली इस घटना का शुरू में अबूधाबी ने घटना खंडन किया था, लेकिन उसके बाद स्वीकार किया कि कुछ ऑयल टैंकर संदिग्ध ऑप्रेशन का निशाना बने हैं।

ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि इस मुलाक़ात में स्वराज ने 2015 में हुए परमाणु समझौते को लागू करने पर बल दिया और कहा कि तेहरान को इस समझौते के तहत आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, बैंकिंग, परिवहन, निवेश और चाबहार बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों को काफ़ी क़रीब लाता है। इसीलिए दोनों देश अपने हितों की सुरक्षा के लिए एक दूसरे के साथ रणनीतिक रूप से सहयोग कर रहे हैं।

भारत एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है, इसलिए उसे ऊर्जा की आपूर्ति के लिए स्थायी स्रोतों की ज़रूरत है और इसके लिए ईरान हमेशा ही एक अच्छा विकल्प रहा है। भारत विश्व स्तर पर तेल का आयात करने वाले कुछ बड़े देशों में से एक है और चीन के बाद ईरान से तेल आयात करने वाला यह दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसलिए अगर ईरान से तेल आयात करने में भारत को किसी भी तरह की कोई रुकावट पेश आती है तो निश्चित रूप से इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।