13 मई 2019 - 13:27
यूरोपीय संघ ने फिर किया परमाणु समझौते का बचाव, पेम्पेयो की यात्रा की उपेक्षा

अमरीका ने 8 मई 2018 को परमाणु समझौते से बाहर निकलने की घोषणा कर दी तो इस्लामी गणतंत्र ईरान को यह आशा थी कि परमाणु समझौते में शामिल तीन यूरोपीय देश और यूरोपीय संघ अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल करते हुए अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के दुष्प्रभावों को कम करने का क़दम उठाएंगे लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी यूरोय ने कुछ दिखावटी क़दम के अलावा कुछ नहीं किया।

यूरोप के इस रवैए को देखते हुए ईरान ने परमाणु समझौते की दो प्रतिबद्धताओं पर अमल करना रोक दिया और यूरोप को 60 दिन का समय दिया है कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल शुरू करे वरना ईरान आगे की कार्यवाही करेगा।

यूरोपीय देशों ने इस स्थिति को देखते हुए अपात बैठक की। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेडरीका मोग्रीनी ने सोमवार को बैठक से पहले कहा कि यूरोपीय देश परमाणु समझौते का अब भी समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने सभी साधनों और राजनैतिक इच्छा शक्ति से परमाणु समझौते का समर्थन जारी रखेंगे और आज की बैठक में हम परमाणु समझौते की प्रतिबद्धताओं पर अमल करने की प्रक्रिया के बारे में चर्चा करेंगे। उन्होंने साथ ही कहा कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का तनाव बढ़ाने से बचना चाहिए।

इस बीच अमरीका की कोशिश यह रही कि ईरान के परमाणु मामले पर यूरोपीय देश भी उसके साथ हो जाएं लेकिन अमरीका को सफलता नहीं मिली तो इस देश के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने ब्रसेल्ज़ की औचक यात्रा की जहां वह यूरोपीय देशों की बैठक में भाग लेंगे। मोग्रीनी ने इस यात्रा की पूरी तरह उपेक्षा की और इस पर बहुत ठंडी प्रतिक्रिया दिखाई है। पोम्पेयो ने अपनी मास्को यात्रा का कार्यक्रम टाल कर अचानक ब्रसेल्ज़ यात्रा की योजना बनाई। मोग्रोनी ने कहा कि मुझे सुबह को पोम्पेयो की यात्रा की सूचना मिली। यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक का एजेंडा है परमाणु समझौते पर अमल करने के तरीक़ो का निर्धारण अब हमें यह नहीं पता कि अमरीकी विदेश मंत्री से मुलाक़ात की संभावना निकलेगी भी या नहीं। मोग्रीनी ने कहा कि बहुत व्यस्त दिन में हम विचार करेंगे कि पोम्पेयो से मुलाक़ात का समय निकल सकता है या नहीं।

मोग्रीनी के बयान से यूरोप का रुख़ साफ़ है कि वह परमाणु समझौते के बारे में अमरीका के रवैए से नाराज़ है और अमरीका से कोई भी सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है। अमरीका परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद एसे हालात पैदा करना चाहता है कि ईरान परमाणु समझौते से निकलने पर मजबूर हो जाए और यह परमाणु समझौता समाप्त हो जाए।