उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सभी क्रान्तिकारी फ़ोर्सेज़ एकजुट रहे।
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को तेहरान में राजनैतिक कार्यकर्ताओं के एक गुट को संबोधित करते हुए कहा कि दुश्मन की ओर से बढ़ता राजनैतिक व आर्थिक दबाव, देश में 1979 में इस्लामी क्रान्ति के समय से अब तक का सबसे भारी दबाव है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दबाव ईरान-इराक़ जंग के दौर से ज़्यादा कठिन है।
डॉक्टर हसन रूहानी ने कहा कि जंग के समय न तो हमें बैंकिंग क्षेत्र में किसी तरह की समस्या थी, न ही तेल के निर्यात और दूसरी वस्तुओं के आयात में कोई समस्या थी। उस समय हम पर हथियारों की पाबंदी लगी थी।
उन्होंने कहा कि कि बाहरी दुनिया का दबाव कभी भी ईरानी राष्ट्र को नहीं झुका पाया है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहाः "झुकना हमारी संस्कृति व धर्म में नहीं है और जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी, इसलिए हम झुक नहीं सकते बल्कि हमें कोई हल निकालना होगा।"