संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थायी दूत मजीद तख़्त रवान्ची ने शुक्रवार को अमरीकी टीवी चैनल एनबीसी से इंटरव्यू में ट्रम्प की इस्लामी गणतंत्र ईरान की सरकार से भेंटवार्ता के बारे में कहा कि ट्रम्प पहले इस सवाल का जवाब दें कि वह वार्ता प्रक्रिया से क्यों हटें, हम तो जेसीपीओए के संयुक्त आयोग के तहत अमरीका सहित परमाणु समझौते के सभी सदस्यों से बातचीत कर रहे थे लेकिन अचानक ट्रम्प ने वार्ता प्रक्रिया से बाहर निकलने का फ़ैसला किया। तो वह इस सवाल का जवाब दिए बिना ईरानियों के साथ बातचीत का क्यों प्रस्ताव दे रहे हैं?
योरोपीय संघ हालांकि यह दावा कर रहा है कि उसने जेसीपीओए को बचाने के लिए पूरी कोशिश की है, लेकिन उसकी कार्यवाही का ज़्यादातर आयाम दिखावटी है।
लोबेलॉग थिंक टैंक ने एक समीक्षा में जेसीपीओए के नाकाम होने के दुष्परिणाम के बारे में योरपीय संघ को सचेत करते हुए कहा है कि योरोप ने इस सहमति के ज़रिए दुनिया में एक खिलाड़ी की हैसियत से अपनी स्थिति को पहले से ज़्यादा मज़बूत करने की कोशिश की लेकिन अगर वह अमरीका के सामने झुकता है तो अपनी स्वाधीनता खो देगा।
योरोपीय संघ को इस सच्चाई को समझना होगा कि ब्रसल्ज़ – वॉशिंग्टन के बीच हितों व मूल्यों के संबंध में गहरी खायी है और यह खायी जेसीपीओए के संबंध में दृष्टिकोणों में अंतर से ज़ाहिर हो गयी है। इसलिए योरोप के लिए ज़रूरी है कि वह अपने हितों की रक्षा और इससे भी बढ़ कर अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए जेसीपीओए का सिर्फ़ शाब्दिक समर्थन करने के बजाए इसके लिए व्यवहारिक रूप से क़दम उठाए।
जैसा कि ईरान के उपविदेश मंत्री अब्बास इराक़ची ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के राजनैतिक मामलों के महानिदेशक रिचर्ड मूर से तेहरान में मुलाक़ात में बल दिया कि योरोप ईरान के चरणबद्ध तरीक़े से अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने को हल्के में न ले।