तेहरान के इमामे जुमा ने कहा है कि जेसीपीओए या परमाणु समझौते के मामले में वर्तमान समय में राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद, विश्व समुदाय और यरोपियों के सामने परीक्षा की कठिन घड़ी है। हुज्जतुल इस्लाम "मुहम्मद जवाद हाज अली अकबरी" ने कहा कि ईरानी जनता अपनी एकता और एकजुटता से शत्रु को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु समझौते के संदर्भ में ईरान की ओर से लिए गए हालिया फैसलों से यूरोपियों में पाया जाने वाला क्रोध इस बात सूचक है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपने राष्ट्रीय हितों के दृष्टिगत सही निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जेसीपीओए के बारे में ईरान की ओर से लिए गए हालिया फैसले, आरंभिक क़मद हैं। अब अगर परमाणु समझौते के बारे में यूरोपियों ने अपने वचनों का पालन नहीं किया तो फिर तेहरान 60 दिनों की समय अवधि के बाद दूसरे क़दम भी उठाएगा।
हुज्जतुल इस्लाम अली अकबरी ने कुछ यूरोपीय देशों की ओर से अमरीका की ईरान विरोधी कार्यवाहियों में उसका साथ न दिये जाने की ओर संकेत करते हुए कहा कि यूरोपियों में अब अमरीका के लिए ख़र्च वहन करने की क्षमता बाक़ी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में ब्रेगज़िस्ट और फ़्रांस में येलो जैकेट जैसी बातें, यूरोप के भीतर गंभीर समस्याओं की सूचक हैं। उन्होंने यह बात बल देकर कही कि वर्चस्ववादी मोर्चा विशेषकर अमरीका और अवैध ज़ायोनी शासन अब विनाश की ओर अग्रसर हैं। तेहरान के इमामे जुमा का कहना था कि प्रतिरोध की सोच अब पूरे संसार में फैल रही है और विश्व में सत्ता का समीकरण प्रतिरोध के केन्द्र की ओर मुड़ चुका है। उन्होंने कहा कि अवैध ज़ायोनी शासन के अपराधों पर प्रतिरोध के मुंहतोड़ मिसाइल आक्रमण ने सिद्ध कर दिया कि ज़ायोनी शासन को केवल 48 घण्टों के भीतर परास्त किया जा सकता है।