बश्शार जाफ़री ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में एनपीटी के सदस्य देशों की 2020 की समीक्षा कॉन्फ़्रेंस की तय्यारी करने वाली समिति में कहाः "सीरिया 1968 में पहल करते हुए इस संधि में शामिल हुआ और उसने 1992 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आईएईए के साथ गैरंटी देने वाली सहमति पर दस्तख़त किए। उसने 2003 में पश्चिम एशिया को जनसंहारक शस्त्र रहित बनाने के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया लेकिन अमरीका ने उसे पास होने से रोक दिया।"
सीरियाई दूत ने पश्चिमी सरकारों की इस्राईल की डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान स्थापित करने और उसे प्रौद्योगिकी, अनुभव व संबंधित पदार्थ मुहैया करने में मदद देने पर आलोचना की। यह वह क़दम था जिससे तेल अविव शासन को सैकड़ों परमाणु वॉरहेड्स बनाने में मदद मिली।
माना जाता है कि ज़ायोनी शासन के परमाणु शस्त्रागार में 200 से 400 परमाणु वॉरहेड्स मौजूद हैं। यह शासन न तो परमाणु वॉरहेड्स होने की पुष्टि और न ही इंकार करता है।
अमरीका और पश्चिमी देशों द्वारा इस्राईल की परमाणु अप्रसार के प्रति कटिबद्ध न होने पर पीठ थपथपाए जाने की वजह से भी यह शासन एनपीटी पर दस्तख़त नहीं कर रहा है।
ज़ायोनी शासन की गुप्त परमाणु गतिविधियों से उस वक़्त पर्दा उठा था जब उसी के डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान में काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ मोर्दख़ाय वनूनों ने ब्रिटेन के द संडे टाइम्ज़ अख़बार को 1986 में ठोस सुबूत पेश किए थे।
माना जाता है कि डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान में ही इस्राईल के परमाणु वॉरहेड्स रखे हुए हैं।