तनयाहू की यह धमकी कोई नई बात नहीं है, ज़ायोनी शासन अपने अवैध गठन की शुरूआत से ही सरकारी आतंकवाद की नीति पर चल रहा है। इस्राईली आतंकवाद पिछले कई दशकों से जारी है और लाखों फ़िलिस्तीनी इस्राईली आतंकवाद का शिकार बन चुके हैं।
हालांकि नेतनयाहू द्वारा फ़िलिस्तीनी नेताओं की हत्या की योजना को आगे बढ़ाने की धमकी से यह स्पष्ट हो गया है कि फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के मुक़ाबले में ज़ायोनी शासन की युद्ध की रणनीति असफल हो गई है। इस्राईल शुक्रवार को ग़ज्ज़ा पट्टी के इलाक़े पर बमबारी शूरू की थी, लेकिन फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी गुटों के जवाबी हमलों के कारण यह लड़ाई 4 दिन के बाद ही समाप्त हो गई और इस्राईल युद्ध विराम स्वीकार करने पर मजबूर हो गया।
इससे पहले अक्तूबर 2018 में भी इस्राईल दो दिन के बाद ही युद्ध विराम के लिए मजबूर हो गया था। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इस्राईल, फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के मुक़ाबले में कितना मजबूर है। इस संदर्भ में इस्राईली सेना के पूर्व प्रमुख बेनी गैंट्स का कहना है कि पिछले 6 महीनों के दौरान नेतनयाहू को ग़ज्ज़ा में दो बार युद्ध विराम के लिए बाध्य होना पड़ा है।
नेतनयाहू ने पिछले एक दशक के दौरान ग़ज्ज़ा की नाकाबंदी करके और युद्ध छेड़कर फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी संगठनों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिरोधी संगठनों ने समस्त कठिनाईयों के बावजूद प्रतिरोध जारी रखने पर बल दिया है।
इस्राईली ऊर्जा मंत्री का कहना है कि हमारे पास ग़ज्ज़ा समस्या का कोई समाधान नहीं है, 30 साल बीत जाने के बावजूद गज्ज़ा इस्राईल के लिए एक ख़तरा बना हुआ है। इसहाक़ राबीन की इच्छा के विपरीत ग़ज्ज़ा न ही मिटने वाला है और न ही समुद्र में डूबने वाला है।