हमास के एक कमांडर भी इस लड़ाई में मारे गए लेकिन फ़िलिस्तीनी संगठनों की संयुक्त कमान ने ज़ायोनी इलाक़ों पर जो मिसाइल बरसाए उनसे कम से कम चार ज़ायोनी मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए।
फ़िलिस्तीनियों ने अपने जवाबी हमले से साबित कर दिया कि वह इस्राईल के हमलों की उसी स्तर पर जवाब देने की क्षमता रखते हैं। इसका मतलब साफ़ है कि जो सामरिक समीकरण इस्राईल चाहता है वह समाप्त हो चुके हैं और शक्ति के संतुलन में भारी बदलाव आया है। इस्राईली अधिकारी यहां तक कहने लगे हैं कि हमास अब एक सशस्त्र संगठन नहीं बल्कि किसी भी अरब देश की सेना जैसी शक्तिशाली सेना है।
इस्राईल ने चार दिन के अंदर गज़्ज़ा पट्टी के इलाक़ों पर बमबारी की और जवाब में फ़िलिस्तीनियों ने 650 मिसाइल ज़ायोनी इलाक़ों पर फ़ायर किए। यही नहीं फ़िलिस्तीनी संगठनों द्वारा फ़ायर किए गए मिसाइलों ने सटीक रूप से अपने लक्ष्यों को भेदा और इस्राईल की बहुचर्चित मिसाइल ढाल व्यवस्था आयरन डोम को पूरी तरह नाकाम कर दिया। फ़िलिस्तीनी संगठन बहुत सरलता से एक इस्राईली यात्री ट्रेन को निशाना बना सकते थे लेकिन उन्होंने ग़ैर सैनिकों को निशाना न बनाने के सिद्धांत पर अमल किया जबकि इस्राईल ने अपने हमलों में अधिकतर आम नागरिकों 14 महीने के बच्चे और गर्भवती महिला को निशाना बनाया।
फ़िलिस्तीनी संगठनों के जवाबी हमलों से गज़्ज़ा पट्टी के क़रीब के ज़ायोनी इलाक़ों में भय व्याप्त हो गया और इन इलाकों लोग भाग भाग कर उत्तरी इलाक़ों में पहुंच गए।
अकतूबर 2018 में होने वाली झड़प में 48 घंटे के भीतर इस्राईल को युद्ध विराम करना पड़ा था जिसके नतीजे में नेतनयाहू की सरकार संकट में आ गई थी क्योंकि कई नेताओं ने संघर्ष विराम के फ़ैसला का विरोध करते हुए उनका साथ छोड़ दिया था। इस्राईल उस हार का बदला लेने की कोशिश में था मगर इस बार की झड़प में इस्राईल को और अधिक नुक़सान पहुंच गया है तो निश्चित रूप से इसका ख़मियाज़ा भी इस्राईली प्रधानमंत्री को भुगतना पड़ेगा।