एशियाई देशों की एक प्राथमिकता सामूहिक शांति, सुरक्षा और स्थाइत्व के लिए सहकारिता को मज़बूत करना है।
एशिया महाद्वीप विभिन्न क्षेत्रों में अपार संभावनाओं से सम्पन्न है परंतु उसे निर्धनता, मादक पदार्थों का उत्पादन और उसकी तस्करी और आतंकवाद के ख़तरे जैसी चुनियों का सामना है। हिंसा एक बड़ी चुनौती है जिसका एशियाई देशों विशेषकर पश्चिम एशिया को सामना है।
इस आधार पर इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए राजनीतिक और आर्थिक समस्त संभावनाओं का प्रयोग किया जाना चाहिये। इसी परिप्रेक्ष्य में एशियाई देशों की संसदें और पार्टियां इन देशों के मध्य समरसता को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
ईरान का मानना है कि एशिया महाद्वीप के पूरब और पश्चिम की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है और उसे अलग नहीं किया जा सकता। पश्चिम एशिया में आतंकवादी घटनाएं और इसी प्रकार यमन की निर्दोष जनता पर बमबारी और इसी प्रकार फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ होने वाले अत्याचार वे चीज़ें हैं जिनका अंत किया जाना चाहिये।
कटु वास्तविकता यह है कि एशिया महाद्वीप के पूरब और पश्चिम में जो विदेशी शक्तियों का हस्तक्षेप है वह इस महाद्वीप की सामूहिक शांति व सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा है। इस प्रकार की स्थिति में एशियाई देशों के मध्य कतर में होने वाली बैठक चुनौतियों की पहचान करके उनके मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आज़रबाइजान गणराज्य में ईरान के पूर्व राजदूत मोहसिन पाक आईन ने एशियाई देशों के मध्य संबंधों के विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अनुभवों ने दर्शा दिया है कि एशियाई देश विश्व के दूसरे देशों पर अपने मूल्य व दृष्टिकोण थोपने की चेष्टा में नहीं हैं।
अफ़ग़ानिस्तान के संस्कृति मंत्री के सहायक सैयद हुसैन फाज़िल आग़ा सिन्चारकी इस बारे में कहते हैं" अतिवाद, हिंसा और होड़ क्षेत्र में सबके लिए संयुक्त चुनौती है। इस आधार पर कहना चाहिये कि वार्ता और एक दूसरे की एतिहासिक पहचान और सम्मान करके इन चुनौतियों का मुकाबला करना चाहिये।
आर्थिक दृष्टि से भी कहना चाहिये कि एशियाई देशों का आर्थिक लेन- देन काफी महत्वपूर्ण है। हालिया वर्षों में एशियाई देशों का आर्थिक विकास ऊर्जा की भारी मांग के साथ रहा है। इसी कारण विश्व की सबसे अधिक ऊर्जा आश्यकता का संबंध एशियाई देशों से रहा है और ईरान एशियाई देशों की ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति करने वाला एक महत्वपूर्ण देश है।
इसी प्रकार ईरान एशियाई, यूरोपीय और अफ्रीक़ी देशों के मध्य पुल की भूमिका निभा रहा है और परिवहन के क्षेत्र में ईरान और फार्स की खाड़ी का विशेष महत्व है। यही वजह है कि अमेरिका एकपक्षीय नीति अपना कर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ ईरान पर प्रतिबंध लगाकर सहकारिता के इस स्ट्रैटेजिक मार्ग में विघ्न उत्पन्न करना चाहता है।
बहरहाल एशियाई देशों में होने वाले परिवर्तन इस बात के सूचक हैं कि वे अपनी संभावनाओं का प्रयोग करके एकजुटता और समरसता से संयुक्त चुनौतियों का मुकाबला कर सकते हैं और कतर में होने वाली बैठक को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।