ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने रविवार को एक आदेश में आईआरजीसी के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अली जाफ़री की सेवाओं की सराहना की और उनके स्थान पर जनरल हुसैन सलामी को नियुक्त किया। वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अपने आदेश में आशा प्रकट की है कि सिपाहे पासदारान आईआरजीसी परिपूर्णता की दिशा में बड़े कदम उठायेगा।
ज्ञात रहे कि 22 अप्रैल वर्ष 1979 को स्वर्गीय इमाम खुमैनी के आदेश से इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान का गठन हुआ था और इसका उद्देश्य षडयंत्रों से मुकाबला और ईरान की सुरक्षा करना है।
सिपाहे पासदारान एक ऐसा इस्लामी संगठन है जो ईरान के क्रांतिकारी समाज से अस्तित्व में आया है और पूरी शक्ति के साथ दुश्मनों के मुकाबले में उसने ईरानी राष्ट्र की शक्ति का प्रदर्शन किया है।
इसी तरह सिपाहे पासदारान ने इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध के दौरान भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है और वह अदम्य साहस, क्रांतिकारी और शहादत प्रेमी भावना के साथ इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभ से ईरानी राष्ट्र का समर्थक रहा है।
इसी प्रकार सिपाहे पासदारान ने आतंकवादी गुटों से मुकाबले में सीरिया और इराक में सराहनीय भूमिका निभाई है और उसने अपने रचनात्मक क्रिया- कलापों से अपनी भूमिका सिद्ध कर दी है।
ईरान की सशस्त्र सेना के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाकिरी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने सिपाहे पासदारान का नाम जो आतंकवादी गुटों की सूची में करार दिया है वह उसके क्रोध का परिणाम का है।
अमेरिकी बुद्धिजीवी नोअम चामस्की ईरान के खिलाफ अमेरिकी आरोपों की आलोचना करते हुए कहते हैं कि अमेरिका आतंकवादी गुटों और दाइश का समर्थन करता है किन्तु वह ईरान पर आतंकवाद के समर्थन और क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाता है।"
बहरहाल इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध, क्रांति और ईरान के शत्रुओं के षडयंत्रों को विफल बनाने और दाइश जैसे आतंकवादी गुटों से मुकाबले में सिपाहे पासदारान ने अपनी शक्ति सिद्ध कर दी है और उसके खिलाफ अमेरिका ने जो कदम उठाया है उससे न केवल सिपाहे पासदारान की भूमिका व मूल्य कम होगा बल्कि आतंकवादी गुटों से मुकाबले में उसकी भूमिका पहले से अधिक स्पष्ट हो गयी है।