अमरीका से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्ज़ ने लिखा है कि अमरीका द्वारा ईरान और वेनेज़ोएला के तेल पर प्रतिबंध की कोशिश से पूरी दुनिया में तेल की मंडी अस्थिर हो जाएगी और तेल की आय पर निर्भर वेनेज़ोएला और ईरान की आय में भारी कमी के बावजूद इन दोनों देशों के नेताओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह मोर्चे में डटे रहेंगे।
अमरीका ईरान और वेनेज़ोएला के तेल पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर व्यापक रूप से काम कर रहा है किंतु ऊर्जा की अत्याधिक ज़रूरत रखने वाले चीन और भारत ने, ईरान से तेल के आयात में कमी करने की अमरीकी मांग को स्वीकार नहीं किया है, हालांकि अमरीका ने इन दोनों देशों को गत नवंबर में छे महीने के लिए छूट भी दी थी।
अमरीका ने जापान, कोरिया और तुर्की को भी ईरान के तेल पर प्रतिबंध से छे महीने की छूट दी थी किंतु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी के अनुसार इन तीन देशों ने भी न्सी के अनुसार इन तीन देशों ने भी छे महीने की छूट दी थी ज़रूरत रखने वाले चीन और भारत ने, ईरान ट्रम्प सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक तेल, ईरान से आयात किया है।
सूत्रों की मानें तो अमरीकी विदेमशंत्री, इन देशों को फिर छूट देने के समर्थक हैं किंतु अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन इस छूट को पूरी तरह से खत्म करने के इच्छुक हैं।
अमरीका की पूर्व उप विदेशमंत्री और ईरान के साथ परमाणु वार्ता करने वाली वेन्डी शरमन का कहना है कि ईरान और वेनेज़ोएला को तेल निर्यात को शून्य तक पहुचांने के बहुत से नुक़सान हैं और इससे तेल के मूल्य में असाधारण रूप से वृद्धि हो जाएगी।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने आगे लिखा है कि चीन के साथ वाशिंग्टन का तनाव, दोनों देशों के मध्य व्यापार और उत्तरी कोरिया के वार्ता में चीन के सहयोग को प्रभावित कर सकता है और तुर्की को अगर तेहरान से तेल आयात में कमी पर मजबूर किया जाएगा तो वह रूस की ऊर्जा पर अधिक निर्भर हो सकता है।
ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों से अमरीका ने सब से पहले सन 2012 में चीन और भारत तथा कुछ अन्य देशों को छूट दी थी। उस समय अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
गत नवंबर के महीने में अमरीका ने ईरान के खिलाफ पुनः प्रतिबंध लगा दिये किंतु चीन, भारत, तुर्की, दक्षिणी कोरिया, जापान, ताइवान, यूनान और इटली को छे महीने तक ईरान से तेल खरीदने की छूट दी।
दिसंबर महीने तक ताइवान, यूनान और इटली ने इस छूट का लाभ नहीं उठाया और ईरान से तेल का आयात बंद रखा किंतु फिलहाल ईरान का तेल निर्यात बढ़ रहा है। फरवरी और मार्च में ईरान ने लगभग एक दशमलव तीन मिलयन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात किया है जो असाधारण रूप से वृद्धि को सिद्ध करता है।
केवल चीन ही प्रतिदिन ईरान से पांच लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है। भारत, ईरानी तेल का दूसरा सब से बड़ा खरीदार है। भारत ने प्रतिदित तीन लाख बैरल से अधिक आयात न करने के अमरीका को दिये गये अपने वचन का पालन किया है किंतु तेल के आयात में कमी भी नहीं की है।
न्यूयार्क टाइम्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत वेनेज़ोएला के तेल पर निर्भर है किंतु वेनेज़ोएला के तेल का सब से बड़ा खरीदार अमरीका है और अमरीका, वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति निकोलस मादूरो का विरोधी है और उसके विरोधी खान ग्वायदो का समर्थन करता है और उसे आशा है कि मादूरो को सत्ता से हटा कर और ग्वायदो को सत्ता में पहुंचा कर वेनेज़ोएला में तेल उत्पादन में असाधारण रूप से वृद्धि कर देगा और इस तरह से वह ईरान पर दबाव डाल सकेगा।
ईरान व वेनेज़ोएला में तेल उत्पादन कम हुआ है और लीबिया में युद्ध तेज़ हुआ है जो एक तेल उत्पादक देश है। इन हालात में नये वर्ष के आरंभ में तेल के मूल्य में वृद्धि हुई है और बीस डालर बढ़ने के बाद यह निश्चित हो गया है कि तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य में चालीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
तेल की अंतरराष्ट्रीय क़ीमत में वृद्धि से अमरीका में पेट्रोल की क़ीमत बढ़ी है और गत एक महीने के दौरान ही अमरीका में पेट्रोल की क़ीमत में प्रतिदिन एक पेनी की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गयी छूट बढ़ायी न गयी तो तेल के मूल्य में अधिक दस डालर की वृद्धि होगी।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अंत में लिखा है कि हालांकि सऊदी अरब तेल उत्पादन में वृद्धि करके तेल की कीमत को कुछ कम करा सकता है किंतु वह एसा इरादा नहीं रखता क्योंकि पिछले साल, ट्रम्प की सरकार ने, सऊदी अरब की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर कुछ देशों को ईरान से तेल खरीदने की छूट दे दी थी।
न्यूयार्क टाइम्ज़ की इस रिपोर्ट से यह समझा जा सकता है कि अमरीका ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगाने में नाकामी के बाद, क्यों वेनेज़ोएला का रुख किया है और क्यों वहां की सरकार को गिराना चाहता है? इस रिपोर्ट से यह भी समझ में आता है कि ईरान और रूस, क्यों वेनेज़ोएला में अमरीकी षडयंत्र को विफल बनाने के लिए एक दूसरे से सहयोग कर रहे हैं?।