अदालत ने फिलिस्तीनियों द्वारा पुनर्विचार की अपील को भी अस्वीकार कर दिया है।
इस्राईली समाचारपत्र हारित्ज़ के अनुसार अदालत ने इन सभी घरों को ढहाने का आदेश देते हुए कहा है कि यह घर, उस भूमि पर बने हैं जहां " अलआद" संस्था, पर्यटन स्थल बनाने की योजना रखती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र में 60 बिल्डिंग हैं जिनमें 500 फिलिस्तीनी रहते हैं। इस क्षेत्र के फिलिस्तीनियों को निर्माण कार्य में बेहद कठिनाइयों का सामना होता है और उन्हें लाइसेंस नहीं मिलता।
अलआद संस्था, ने इस क्षेत्र पर ग़ैर क़ानूनी तौर पर क़ब्ज़ा कर रखा है और पर्यटन स्थल बनाने के बहाने फिलिस्तीनियों को बेघर कर रही है।
अलआद संस्था की इस कार्यवाही पर अलअज़हर ने प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए, बैतुलमुक़द्दस के यहूदीकरण की ओर से चेतावनी देते हुए कहा है कि इस प्रकार की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
अलअज़हर के बयान में कहा गया है कि ज़ायोनी शासन की कार्यवाहियां फिलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।