अंतरसंसदीय संघ का गठन वर्ष 1889 में हुआ था और इसका उद्देश्य संसदों के मध्य वार्ता द्वारा राष्ट्रों के मध्य शांति व सुरक्षा स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है। इस समय लगभग 180 देश इसके सदस्य हैं।
इस संघ की जो बैठक क़तर की राजधानी दोहा में हो रही है वह 10 अप्रैल तक जारी रहेगी और इसमें आतंकवाद और तस्करी विशेषकर मादक पदार्थों की तस्करी जैसे विषयों की समीक्षा की जायेगी।
ईरानी सांसद काज़िम जलाली कहते हैं" आज इस संघ को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह संघ वर्ष में दो बार बैठकें करता है और इसमें मानवाधिकार तथा अंतरराष्ट्रीय नीति जैसे विषयों के बारे में चर्चा की जाती है"।
संसदों और राष्ट्रीय इच्छाओं के बीच निकट संबंध है और संसदें इसे प्रतिबिंबित कर सकती हैं। इस आधार पर दोहा में होने वाली बैठक राष्ट्रसंघ की महासभा की भांति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहकारिता के संबंध में विचारों के आदान- प्रदान के लिए उचित अवसर हो सकती है।
दोहा रवाना होने से पहले ईरान के संसद सभापति डॉक्टर अली लारीजानी ने कहा था कि अंतरसंसदीय संघ की बैठक में उपस्थिति अमेरिकी रवइये के बारे में ईरानी दृष्टिकोण को बयान करने का बेहतरीन अवसर है।
अमेरिका के एक पक्षीय रवइये के कारण क्षेत्र और विश्व को विभिन्न प्रकार की बड़ी- बड़ी चुनौतियों का सामना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरसंसदीय संघ एक महत्वपूर्ण संघ है और इस संघ की बैठक में विभिन्न देशों की संसदें एक दूसरे से विचारों का आदान- प्रदान करके चुनौतियों को समझने और शांति व सुरक्षा को आघात पहुंचाने वाले कारकों की पहचान करके शांति व सुरक्षा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।