7 अप्रैल 2019 - 15:11
फिलिस्तीन और ईरान के संबंध में अब भी मतभेद यथावत बाकी हैं" फ्रांस के विदेशमंत्री

अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने जी-7 की बैठक में भाग नहीं लिया जिसे बहुत से जानकारों का कहना है कि ट्रंप सरकार जी-7 को महत्वहीन दर्शाना चाहती है।

फ्रांस में जी-7 की होने वाली बैठक को कुछ चुनौतियों का सामना है जैसे सदस्य देशों के मध्य मध्यपूर्व विशेषकर फिलिस्तीन और ईरान के बारे में कोई सहमति नहीं बन पाइ है। इसी प्रकार इस बैठक में अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने भाग नहीं लिया।

गुट-7 की दो दिवसीय बैठक ऐसी स्थिति में आयोजित हुई जब विश्व को लीबिया में लड़ाई के नये दौर, ब्रिटेन में ब्रिग्जिट के बंद गली में पहुंच जाने, फिलिस्तीन और सीरिया की गोलान हाइट्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों के बारे में अमेरिकी कार्यवाहियों को लेकर चुनौतियों का सामना है।

अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने जी-7 की बैठक में भाग नहीं लिया जिसे बहुत से जानकारों का कहना है कि ट्रंप सरकार जी-7 को महत्वहीन दर्शाना चाहती है। फ्रांस में एक डिप्लोमैट ने इस संबंध में कहा कि माइक पोम्पियो ने इस बैठक में भाग न लेने के साथ एक संदेश भेजा है जिसमें कहा है कि इससे अधिक महत्वपूर्ण कार्य हमारे पास है।

G-7 की बैठक से अमेरिकी विदेशमंत्री का गायब रहना वास्तव में अमेरिका की एकपक्षीय नीति के जारी रहने का सूचक है। जब से डानल्ड ट्रंप अमेरिका का राष्ट्रपति बने हैं तब से अमेरिका और यूरोप के संबंध बहुत तनावपूर्ण हो गये हैं इस प्रकार से कि ट्रंप तानाशाहों की भांति अपनी एक पक्षीय नीतियों व दृष्टिकोणों को अपने यूरोपीय घटकों पर भी थोपने की चेष्टा में हैं।

साथ ही यूरोपीय देशों का ट्रंप की मांगों का न मानना इस बात का कारण बना है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे विषयों के बारे में वह एक पक्षीय नीति पर पहले से अधिक आग्रह कर रहे हैं और यह ऐसा विषय है जो वाशिंग्टन के यूरोपीय घटकों के क्रोध का कारण बना है।

अमेरिका और इस गुट के दूसरे सदस्यों के मध्य मतभेद इस बात का कारण बना है कि कुछ विश्लेषक G-7 के बजाये उसे 6+1 गुट के नाम से याद कर रहे हैं।

फ्रांस के विदेशमंत्री ने G-7 के सदस्य देशों के मध्य मतभेदों को स्वीकार करते हुए कहा है कि फिलिस्तीन, इस्राईल और ईरान के संबंध में अब भी मतभेद यथावत बाकी हैं।