5 अप्रैल 2019 - 12:57
तुर्की, रूस से S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली अवश्य ख़रीदेगाः ओग़लू

वाशिंग्टन का दावा है कि तुर्की द्वारा इस मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली की खरीदारी से F-35 युद्धक विमानों सहित नाटो के दूसरे युद्धक विमानों के कमज़ोर बिन्दुओं का पता रूस को चल जायेगा।

पिछले तीन वर्षों के दौरान अमेरिका और तुर्की के संबंध बहुत अधिक तनावपूर्ण रहे हैं। 20 जनवरी वर्ष 2017 में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद तुर्क अधिकारियों को आशा थी कि अमेरिका और तुर्की के संबंधों में नये दौर का आरंभ होगा परंतु व्यवहारिक रूप से दोनों देशों के संबंधों में वृद्धि हो गयी।

अमेरिका और तुर्की के बीच जिन विषयों को लेकर मतभेद है उनमें से एक तुर्की द्वारा रूस से S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली की ख़रीदारी है और अंकारा इस ख़रीदारी पर आग्रह कर रहा है।

तुर्की नाटो का एक सदस्य देश है और वाशिंग्टन का दावा है कि तुर्की द्वारा इस मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली की खरीदारी से F-35 युद्धक विमानों सहित नाटो के दूसरे युद्धक विमानों के कमज़ोर बिन्दुओं का पता रूस को चल जायेगा।

इसी प्रकार ट्रंप सरकार इस बात से चिंतित है कि रूसी हथियारों की ख़रीदारी और रूस से हथियार संबंधी निर्भरता से अंकारा का रुझहान पहले से अधिक मॉस्को की ओर हो जायेगा जबकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी अधिकारी रूस के S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली के मुकाबले में पेट्रियाट मिसाइल व्यवस्था की कमज़ोरी से चिंतित हैं।

बहरहाल इस मतभेद के कारण अमेरिका तुर्की को F-35 युद्धक विमान नहीं दे रहा है और उसका कहना है कि रूसी S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली इस युद्धक विमान के लिए ख़तरा है। अमेरिका ने इस मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली की खरीदारी को रोकने के लिए गत सोमवार से F-35 युद्धक विमानों के कल पुर्ज़ों को तुर्की को देना बंद कर दिया है।

इसी प्रकार अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेन्स ने तुर्की को धमकी देते हुए कहा है कि तुर्की को दो चीज़ों में से एक का चयन करना होगा वह या तो रूस से S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली खरीदे या नाटो में रहे।

इसी प्रकार उन्होंने नाटो के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाशिंग्टन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि तुर्की को इस बात फैसला करना होगा कि वह हमारे साथ रहेगा या रूस से S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली की खरीदारी करके नाटो के साथ भागीदारी को खत्म करेगा।

इसी प्रकार अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने कहा कि नाटो के सदस्यों को दुश्मनों से हथियार नहीं खरीदना चाहिये।

रोचक बात यह है कि माइक पेन्स का यह बयान ऐसी स्थिति में सामने आ रहा है जब तुर्की के विदेशमंत्री मौलूद चाऊश ओग़लू ने वाशिंग्टन में बल देकर कहा है कि उनका देश रूस से S-400 मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणाली अवश्य ख़रीदेगा।

बहरहाल दोनों देशों के अधिकारियों के बयानों के दृष्टिगत प्रतीत यह हो रहा है कि दोनों देशों के मतभेद न केवल कम नहीं हुए हैं बल्कि उनमें वृद्धि भी हो रही है।