3 अप्रैल 2019 - 12:19
बाढ़ से होने वाले नुक़सान की भरपाई की जाए, इस्लाम ने उपद्रव और विनाश का अंत करने के लिए जंग की

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम को ईश्वरीय दूत के रूप में भेजा जाना नई सभ्यता की रचना के लिए एक महान क्रिया थी।

पैग़म्बरे इस्लाम की ओर से अपने पैग़म्बर होने की घोषणा की वर्षगांठ 27 रजब बराबर 3 अप्रैल 2019 को देश के उच्चाधिकारियों, तेहरान में तैनात इस्लामी देशों के राजदूतों और विभिन्न जनवर्गों से मुलाक़ात में ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम के मिशन की दो विशेषताएं थीं ईश्वर की उपासना और नास्तिकता तथा अत्याचार से लड़ना। उन्होंने कहा कि आज ईरान की इस्लामी क्रान्ति और इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था भी पैग़म्बरे इस्लाम के मिशन की एक कड़ी है और ईश्वर का वादा है कि एकेश्वरवाद और नास्तिकता के बीच टकराव में जीत सत्य की होगी।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने देश के कुछ प्रांतों में हालिया दिनों आने वाली बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में लोगों के बीच एकजुटता और सुव्यवस्थित प्रयास स्पष्ट रूप से नज़र आया, ईरान की जनता अपने पूरे अस्तित्व से मैदान में उतरी और अधिकारियों का हाथ बंटाया जबकि अधिकारी भी जनता की मदद से आरंभिक काम अंजाम देने में सफल हुए।

आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के निदान के संदर्भ में अभी बहुत से काम शेष हैं और मैंन अधिकारियों पर ज़ोर दिया है कि पुनरवास और नुक़सान की भरपाई का महत्वपूर्ण काम अब शुरू होगा और ज़रूरी है कि सारे नुक़सान की भरपाई की जाए।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमारी प्रिय जनता भी अधिकारियों से सहयोग जारी रखे क्योंकि जनता की मदद बहुत सी समस्याओं को हल कर देती है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने अपने भाषण में अलग अलग समाजों में ईश्वर की उपासना तथा दुष्ट शक्तियों से मुक़ाबले के लिए ईश्वरीय दूतों को भेजे जाने का हवाला दिया और कहा कि दुष्ट शक्तियां वही हैं जो एकेश्वरवाद के मिशान के मार्ग में रुकावट बनती हैं और आज के समय में इसका स्पष्ट उदाहरण अमरीका तथा कुछ अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष हैं।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पैग़म्बरों को भेजने का उद्देश्य नवीन सभ्यता तथा आदर्श समाज की स्थापना है जिसमें ज्ञान, शिष्टाचार, जीवन शैली यहां तक कि युद्ध भी शामिल होता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में जंग भी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात इस जंग का रुख़ है क्योंकि हमेशा दुष्ट ताक़तें उपद्रह फैलाने और वर्चस्ववाद तथा अपने घटिया स्वार्थों के लिए युद्ध करती हैं, यह युद्ध बुरा है जबकि दुष्ट शक्तियों का मुक़ाबला करना प्रशंसनीय है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि वर्षों से जारी ज़ायोनी शासन का विस्तारवाद दुष्ट शक्तियों के युद्धोन्माद का स्पष्ट उदाहरण है जबकि उसके मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनी जियालों और हिज़्बुल्लाह के जवानों का संघर्ष इसी तरह आठ वर्षीय युद्ध में ईरान की मोमिन जनता का संघर्ष ईश्वर के मार्ग में जेहाद के स्पष्ट उदहारण हैं।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था के ख़िलाफ़ दुशमनी की वजह सत्य और असत्य के मोर्चों के बीच जारी लड़ाई है क्योंकि दुष्ट शक्तियों का मोर्चा एकेश्वरवादी विचारधारा और मिशन के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा कि अमरीका तथा आले सऊदी जैसे उसके पिट्ठू उस समय तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक एकेश्वरवाद को तज नहीं दिया जाता। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता नेक हा कि यदि ईरानी राष्ट्र इसी तरह आगे भी अपनी डगर पर आगे बढ़ती रही तो अमरीका तथा उसके पिट्ठुओं को निश्चित रूप से पराजित कर देगी।