बोल्टन ने सोमवार को ट्वीट करके ईरान पर आतंकवाद का समर्थन करने और क्षेत्र तथा दुनिया में विनाशकारी कार्यवाहियां अजाम देने का आरोप दोहराया और कहा कि अमरीका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश जारी रहेगा ताकि ईरान अपना रवैया बदले।
परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद अमरीका ने ईरान पर हर आयाम से दबाव डालने की कोशिश की है। 8 मई 2018 को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने परमाणु समझौते से बाहर निकलने की घोषणा की थी।
ट्रम्प के इस फ़ैसले की दुनिया भर में निंदा की गई थी।
ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने गत 9 जनवरी के अपने भाषण में कहा कि अमरीकी अधिकारी बहुत ख़ुश होकर कह रहे हैं कि इस समय ईरान पर जो प्रतिबंध लगाए गए हैं उनका इतिहास में कोई उदाहरण नहीं है लेकिन ईरानी राष्ट्र इस मामले में अमरीका को जिस पराजय का स्वाद चखाएगी उसका भी इतिहास में कोई उदाहरण नहीं होगा।
विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने रविवार को ट्वीट किया कि ईरान के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की नीतियां नाकाम हो चुकी हैं और ट्रम्प बहुत हाथ पांव मार रहे हैं कि ईरान के बारे में अमरीकी नाकाम नीतियों को किसी तरह काययाब ज़ाहिर करें।