28 मार्च 2019 - 17:28
सऊदी नरेश को लगा झटका, ट्यूनीशिया विश्वविद्यालय का मानद उपाधि देने से इंकार

ट्यूनीशिया के “अज़्ज़ैतूनिया” विश्वविद्यालय के प्रमुख ने कहा है कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सऊदी अरब के शासक सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को डॉक्टर की मानद उपाधि देने से इंकार कर दिया है।

समाचार एजेंसी मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक़, ट्यूनीशिया के “अज़्ज़ैतूनिया” विश्वविद्यालय के प्रमुख “हिशाम क़रीसा” ने बताया है कि आले सऊद शासन के नरेश को विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर की मानद उपाधि दी जाने वाली थी। उन्होंने बताया कि सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को दी जाने वाली उपाधि को लेकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच गंभीर विवाद हो गया जिसके बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सऊदी नरेश को डॉक्ट्रेट की उपाधि देने से इंकार कर दिया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, ट्यूनीशिया की सरकार, अज़्ज़ैतूनिया विश्वविद्यालय पर इस बात के लिए बल दे रही थी कि वह सऊदी शासक को मानद उपाधि दे, लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सलमान बिन अब्दुल अज़ीज को उपाधि देने से साफ़ इंकार कर दिया है। ज़ैतूनिया विश्वविद्यालय के प्रमुख ने कहा कि सऊदी नरेश को उपाधि न दिया जाना कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं है क्योंकि हमारा विश्वविद्यालय वैसे भी किसी ऐसे व्यक्ति को उपाधि नहीं देता जिसने कोई शोध न किया हो। उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्याल के क़ानून के अनुसार डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि केवल शोधकर्ताओं को ही दी जाती है।

अज़्ज़ैतूनिया विश्विद्यालय ने अपने बयान में कहा है कि हम सऊदी अरब के शासक का अपने विश्विद्यालय में किसी और तरीक़े से स्वागत करने के लिए तैयार हैं लेकिन उनको मानद उपाधि नहीं दे सकते हैं।

दूसरी ओर अज़्ज़ैतूनिया विश्वविद्यालय के एक प्रसिद्ध प्रोफेसर सामी बराहम ने विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए क़दम की प्रशंसा करते हुए कहा कि अज़्ज़ैतूनिया विश्वविद्यालय का यह क़दम सराहनीय और स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि मैं पूरी दुनिया के विश्वविद्यालयों से अपील करता हूं कि उनके द्वारा दी जाने वाली डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि को हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति को ही दिया जाए जो उसके योग्य हो।

उल्लेखनीय है कि आले सऊद शासन के शासक सलमान बिन अब्दुल अज़ीज बहुत जल्द ट्यूनीशिया का दौरा करने वाले हैं। याद रहे कि अरब देशों में कई संस्थाओं द्वारा हालिया सर्वों में जो बात सामने आई है उसके अनुसार अरब देशों की ज़्यादातर जनता संयुक्त रूप से इस बात पर सहमत है कि सऊदी अरब की आले सऊद सरकार और उसके शासक एवं युवराज क्षेत्र में अमेरिकी और इस्राईली एजेंट के रूप में सक्रिय हैं और उनकी हर नीति इन दोनों के हितों को सामने रखकर बनती है। अरब देशों में इस समय सोशल मीडिया से लेकर आम जनता में एक नारा बहुत तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है जिसका हिन्दी अनुवाद है, “जो ट्रम्प का यार है वह इस्लाम का ग़द्दार है”