संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि घृणा से भरे भाषण सोशल मीडिया के माध्यम से जंगल में आग की तरह फैल रहे हैं। गुटेरस ने कहा कि मैं विदेशी लोगों को पसंद न करने की मानसिकता, नस्लवाद और अहिष्णुता के उभार के मौजूदा दौर से बहुत चिंतिंत हूं। मीडिया के अनुसार उन्होंने उदारवादी लोकतंत्रों और सत्तावादी देशों में नस्लवाद तथा असहिष्णुता बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। संयुक्त राष्ट्र महासभा में सोमवार को एक कार्यक्रम में गुटेरस ने कहा कि खेद की बात है कि नफरत भरे भाषण मुख्यधारा में आ रहे हैं और वे सोशल मीडिया तथा रेडियो के जरिए जंगल में आग की तरह फैल रहे हैं। गुटेरस ने न्यूजीलैंड की मस्जिदों पर आतंकी हमले का भी जिक्र किया जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि आज हमें नस्लवाद, धार्मिक घृणा तथा आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता से खड़ा होना चाहिए।
गुटेरस ने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, विदेशियों को नापसंद करने, सामाजिक और जातीय भेदभाव सहित असहिष्णुता और मुस्लिम विरोधी नफरत को खत्म करने के वायदे को फिर से दोहराने और उसपर अमल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश विदेशियों को नापसंद करने की मानसिकता और नस्लवाद से अछूता नहीं है और इस प्रकार की ताकतें लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक स्थिरता और शांति के लिए खतरा हैं।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि जब लोगों पर उनकी नस्ल, धर्म, या जाति की वजह से शारीरिक तौर पर या मौखिक रूप से या सोशल मीडिया के जरिये हमला किया जाता है तो पूरा समाज अपमानित होता है। इसलिए यह अहम है कि हम समानता के सिद्धांतों और मानव गरिमा की रक्षा के लिए साथ आएं और एकजुट हो कर खड़े हों। गुतारेस ने कहा कि हमें नस्लीय श्रेष्ठता की हानिकारक और विशिष्ट धारणा को खत्म करने के लिए सभी को साथ जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने नव-नाजी सोच और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा के हालिया उभार को खत्म करने पर जोर दिया। महासभा की अध्यक्ष फर्नांडा एस्पिनोसा ने कहा कि नफरत से भरे भाषण अभिव्यक्ति की आजादी नहीं हैं बल्कि नस्लवाद हैं। हर समस्या के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराना बंद किया जाना चाहिए और संकीर्ण सोच रखने वाले राष्ट्रवादियों को वैश्विक समाधानों की खोज को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।