सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 को यूएई, बहरैन, मिस्र, सूडान, अमरीका, इस्राईल और ब्रिटेन के समर्थन से यमन के ख़िलाफ़ व्यापक युद्ध छेड़ दिया था।
युद्ध और घेराबंदी के कारण भुखमरी से पिछले चार वर्षों के दौरान यमन में पांच साल से कम उम्र के 1 लाख 25 हज़ार से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने यमन संकट को मानव इतिहास की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक बताया है।
सीधे सऊदी गठबंधन की बमबारी के कारण अब तक 50 हज़ार से अधिक यमनी आम नागरिक मारे जा चुके हैं और देश का आधारभूत ढांचा पूर्ण रूप से नष्ट हो चुका है।
यमन में युद्ध के ख़िलाफ़ विशाल प्रदर्शन सोमवार से ही शुरू हो गए थे, जो मंगलवार को अपने चरम पर पहुंच गए।
राजधानी सनआ में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए यमन के ग्रांड मुफ़्ति और अन्य नेताओं ने मुस्लिम जगत से सऊदी सैन्य गठबंधन के युद्ध अपराधों एवं अमानवीय अत्याचारों पर चुप्पी तोड़ने की मांग की।
यमन क्रांति की उच्च समिति के प्रमुख मोहम्मद अली अल-हौसी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, यमनी जनता अत्याचारियों के सामने घुटने नहीं टेकेगी और आख़िर तक डटी रहेगी। अंततः हम दुश्मन को पराजित कर देंगे।
उन्होंने सऊदी सैन्य गठबंधन को आधुनिक हथियार और लेज़र गाइडेड बम देने पर अमरीका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की कड़ी निंदा की, जिनका इस्तेमाल यमनी जनता के जनंसाहर के लिए किया जा रहा है।
यमन में इस समय अंसारुल्लाह आंदोलन या अल-हौसी आंदोलन देश का शासन और युद्ध की कमान संभाल रहा है।
एसीएलईडी की नई रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी सैन्य गठबंधन के हमलों के कारण अब तक 56000 से अधिक यमनी अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के मुताबिक़, दो करोड़ 22 लाख यमनी नागरिक भुखमरी का शिकार हैं, जिनमें से 84 लाख मौत की कगार पर पहुंच चुके हैं।