24 मार्च 2019 - 13:58
फ़ॉक्स न्यूज़ का ईरान के ख़िलाफ़ नया दावा

ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम के बारे में पश्चिमी मीडिया हल्क़ों का दुष्प्रचार जारी है।

पश्चिमी मीडिया इस कोशिश में लगा है कि विश्व जनमत ग़लत बातों को आधार बनाकर ईरान विरोधी दृष्टिकोण अपनाए। इसी परिप्रेक्ष्य अमरीकी न्यूज़ चैनल फ़ॉक्स न्यूज़ ने एक रिपोर्ट में दावा किया कि उसके पास जो सूचनाएं हैं कि जिसे इस चैनल ने गुप्त रूप से परमाणु हथियार और मीज़ाईल प्रौद्योगीकी हासिल करने का नाम दिया है, उनके आधार पर जर्मन सरकार ईरान की कोशिशों के बारे में कुछ सूचनाओं का पर्दाफ़ाश करने से पीछे हट गयी है। फ़ॉक्स न्यूज़ के अनुसार, जर्मनी ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध और जेसीपीओए की रक्षा के लिए यह क़दम उठाया है।

यह दावा ऐसी हालत में सामने आया हे कि समाचार एजेंसी रोयटर्ज़ ने हाल में एक रिपोर्ट में लिखा कि गुप्त दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने मार्च महीने में ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम की वजह से उसके ख़िलाफ़ नई पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव पेश किया लेकिन इसका इटली सहित योरोपीय संघ के दूसरे सदस्य देशों ने विरोध किया जो इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाना चाहते हैं।

ईरान की रक्षा क्षमता को ख़तरा दर्शाने पर आधारित निराधार दावे, ऐसी हालत में किए जा रहे हैं कि ईरान कस मीज़ाईल कार्यक्रम रक्षात्मक आयाम रखता है और इसे ख़तरे के मुक़ाबले में निवारक क्षमता के आधार पर डिज़ाइन किया गया है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी भी प्रस्ताव में ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम या मीज़ाईल परीक्षण को वर्जित नहीं किया गया हैं

जैसा कि अमरीका के अंतर्राष्ट्रीय रणनैतिक अध्ययन थिंक टैंक के अधिकारी मार्क फ़िट्ज़ पैट्रिक ने दिसंबर में अपने ट्वीट में कहा था कि ईरान का मीज़ाईल कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन नहीं है। यह प्रस्ताव सभी सदस्य देशों से परमाणु समझौते जेसीपीओए को कमज़ोर करने वाले क़दम से दूर रहने पर बल देता है। अगर ईरान सुरक्षा परिषद का उल्लंघन कर रहा है तो फिर अमरीका भी ऐसा ही कर रहा है।

इन सब बातों से स्पष्ट है कि ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम के बारे में फ़ॉक्स न्यूज़ सहित पश्चिमी मीडिया के दुष्प्रचार का लक्ष्य ईरान पर अमरीका सहित पश्चिम की वर्चस्ववादी नीतियों को स्वीकार करने के लिए दबाव डालना है।