23 मार्च 2019 - 18:36
ईरान विरोधी रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित हैः इस्माईल बक़ाई

मानवाधिकार का दावा दूसरे देशों पर दबाव डालने का पश्चिम का एक अन्य हथकंडा है।

ईरान पर दबाव डालने के लिए शुक्रवार को मानवाधिकार परिषद में तेहरान के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया। जनेवा में मानवाधिकार परिषद में ईरानी राजदूत इस्माईल बकाई ने इस प्रस्ताव को ग़ैर रचनात्मक और राजनीति से प्रेरित बताया।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के हनन में जिन सरकारों का लंबा अतीत है वही सरकारें इस प्रस्ताव की मूल समर्थक हैं और उन्होंने पश्चिम एशिया में हथियार भेजने, आतंकवादी और विनाशकारी गतिविधियों के समर्थन को इन सरकारों के क्रिया- कलाप बताये।

हालिया कुछ वर्षों के दौरान स्वीडन, कनाडा, अमेरिका और कुछ दूसरे देशों के प्रस्ताव पर ईरान के खिलाफ मानवाधिकार के प्रस्ताव पारित किये गये हैं और इन देशों की रिपोर्टों का आधार ईरान में मानवाधिकार की स्थिति के संबंध में राष्ट्रसंघ के विशेष रिपोर्टर की रिपोर्ट रही है।

ईरान के खिलाफ मानवाधिकार परिषद में जो प्रस्ताव शुक्रवार को पारित किया गया उसका कोई नैतिक आधार नहीं है क्योंकि पश्चिम एशिया में जो अपराध हुए हैं और हो रहे हैं उनमें इन देशों और उनके घटकों के समर्थन किसी से ढ़के- छिपे नहीं है और ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका ने जो प्रतिबंध लगा रखे हैं उसमें इन देशों ने अर्थपूर्ण मौन धारण कर रखे हैं।

ये देश पश्चिमी समाजों में अतिवादी और आतंकवादी तत्वों का समर्थन करके मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। न्यूज़ीलैंड में होने वाले हालिया आतंकवादी हमले को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।  

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने तुर्की के इस्तांबोल नगर में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी की होने वाली आपात कालीन बैठक में मुसलमानों के खिलाफ होने वाले प्रोपैगन्डा में वृद्धि पर चिंताई जताई और कहा कि जो संस्थाएं व संगठन मुसलमानों के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं उनका समर्थन अमेरिका और विश्व के दूसरे क्षेत्रों के पूंजीपति कर रहे हैं और अगर इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया तो ये विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा हैं।