18 मार्च 2019 - 18:57
अमेरिकी दावों पर विश्वास नहीं करना चाहियेः ज़खारोफ़

सेना प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाकिरी ने दमिश्क पहुंचने पर कहा कि त्रिपक्षीय बैठक में सीरिया में मौजूद उन विदेशी सैनिकों की उपस्थिति के मुद्दे की भी समीक्षा की जायेगी जो दमिश्क सरकार की अनुमति के बिना इस देश में मौजूद हैं।

ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाक़िरी एक उच्च सैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ सीरिया पहुंचे हैं जहां वह ईरान, इराक और सीरिया के बीच होने वाली त्रिपक्षीय बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में तीनों देशों के सेना प्रमुख भाग लेंगे और उसमें आतंकवाद से मुकाबले के मार्गों की समीक्षा की जायेगी।

आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में ईरान, इराक और सीरिया के मध्य होने वाली सहकारिता का ध्यान योग्य परिणाम निकला है। यह सफलता उस वक्त मिली है जब आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले के लिए अमेरिका की अगुवाई में बने तथाकथित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने आतंकवाद से मुकाबले में न केवल कोई भूमिका नहीं निभाई बल्कि वह दाइश से मुकाबले के मार्ग की रुकावट बन गया।

रूस के राजनीतिक व स्ट्रैटेजिक केन्द्र के प्रमुख व्लादिमीर ज़ख़ारोफ़ ने आतंकवादी गुटों के प्रति अमेरिकी समर्थन की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस समर्थन का कारण यह है कि क्षेत्र में तनाव उत्पन्न करने के लिए अमेरिका को आतंकवादी गुटों की आवश्यकता है और ट्रंप के सत्ता में आने से इस प्रक्रिया में गति आ गयी है।

इसी प्रकार उन्होंने बल देकर कहा कि इसी कारण आतंकवाद से मुकाबले पर आधारित अमेरिकी अधिकारियों के दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिये और क्षेत्रीय देशों विशेषकर इराक और सीरिया को अमेरिकी और पश्चिमी देशों की सैनिकों की गतिविधियों से होशियार रहना चाहिये।

इराक और सीरिया में आतंकवाद अंतिम सांसे ले रहा है इस स्थिति में आज नहीं तो कल उन देशों को सीरिया से निकलना होगा जिनके सैनिक दमिश्क सरकार की अनुमति के बिना इस देश में मौजूद हैं।

सेना प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाकिरी ने दमिश्क पहुंचने पर कहा कि त्रिपक्षीय बैठक में सीरिया में मौजूद उन विदेशी सैनिकों की उपस्थिति के मुद्दे की भी समीक्षा की जायेगी जो दमिश्क सरकार की अनुमति के बिना इस देश में मौजूद हैं।

अनुभवों ने दर्शा दिया है कि क्षेत्रीय देशों के मध्य सहकारिता आतंकवाद, असुरक्षा, हिंसा और अतिवाद से मुकाबले का एकमात्र मार्ग है। इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान ने इराक और सीरिया को सैनिक परामर्श की सहायता देकर आतंकवाद से मुकाबले में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

यहां इस बात का उल्लेख ज़रूरी है कि इराक और सीरिया की सरकारों ने औपचारिक रूप से ईरान की सहायता का आह्वान किया था।

राजनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ सैयद रज़ा सद्र अलहुसैनी कहते हैं कि आतंकवाद एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गयी है और आतंकवाद से मुकाबले में ईरान, इराक और सीरिया के दृष्टिकोण सार्थक व एक दूसरे के निकट हैं और इसी परिप्रेक्ष्य में वे एक दूसरे से सहकारिता कर रहे हैं।

बहरहाल ईरान, इराक और सीरिया ने आतंकवाद से मुकाबले में जो सहकारिता की है और कर रहे हैं उसके अच्छे व वांछित परिणाम निकले हैं और राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि क्षेत्रीय देशों को चाहिये कि आतंकवाद से मुकाबले में अपनी आंतरिक क्षमताओं व योग्यताओं पर भरोसा करें और आतंकवाद से मुकाबले में इन तीनों देशों ने जिस दृढ़ता का परिचय दिया है उससे दूसरे क्षेत्रीय देशों की स्थिति को तनावग्रस्त होने से रोकने में बहुत मदद मिली है।