16 मार्च 2019 - 17:24
न्यूज़ीलैंड में आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्रपति रूहानी की पश्चिम में इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ जी जान से संघर्ष की अपील

न्यूज़ीलैंड में आतंकवादी हमले के बाद ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिम में इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ जी जान से लड़ने की अपील की है।

डॉक्टर हसन रूहानी ने कहा कि शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड में जनसंहार के मद्देनज़र एक बार फिर, कुछ पश्चिमी सरकारों द्वारा इस्लामोफ़ोबिया की भड़काई गई आग को बुझाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष ज़रूरी हो गया है।

शुक्रवार को अपने संदेश में राष्ट्रपति रूहानी ने मुस्लमान नमाज़ियों पर हमले की "आतंकवादी व नस्लभेदी" हमले के रूप में भर्त्सना की और इसे बर्बरतापूर्ण व पीणादायक बताया जिससे ईरानी राष्ट्र सहित पूरी दुनिया में मुस्लिम जगत आहत हुआ है।

शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड के क्राइस्ट चर्च शहर में दो मस्जिदों पर एक आतंकवादी ने बंदूक़ से हमला किया जिसमें 49 लोग शहीद हुए और 40 से ज़्यादा घायल हुए। यह हमला न्यूज़ीलैंड में सामूहिक हत्या का सबसे बड़ा हमला था जिसकी न्यूज़ीलैंड की प्रधान मंत्री जसिन्डा अडर्न ने आतंकवादी हमले के रूप में भर्त्सना की।

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहाः "यह बर्बरतापूर्ण अपराध कि जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष व निहत्थे उपासक शहीद व घायल हुए, इस बात का एक और सुबूत है कि आतंकवाद और दूसरे धार्मिक व जातीय समूहों तथा नफ़रत फैलाने और पश्चिम में कुछ सरकारों द्वारा इस्लामोफ़ोबिया को हवा देने की कोशिशों के ख़िलाफ़ जी जान से लड़ाई की ज़रूरत है।"

उन्होंने आगे कहाः "इस अपराध से ज़ाहिर होता है कि आतंकवाद अभी भी दुनिया के अहमद मुद्दों में है और दुनिया के किसी भी भाग में हिंसा और चरमपंथ के ख़िलाफ़ सभी देशों के समन्वित दृष्टिकोण व लड़ाई की ज़रूरत है।"

ईरानी राष्ट्रपति ने कहाः "इस्लामी गणतंत्र ईरान आतंकवाद और नस्लभेद के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई के लिए अभी भी कटिबद्ध है और उसे यक़ीन है कि मुस्लिम जनता की एकता से दुश्मन की इस तरह की साज़िश का नतीजा सिर्फ़ उसकी और बदनामी के रूप में सामने आएगा।"

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ख़ास तौर पर मुसलमान सरकारों से अपील की कि वे इस तरह के मानवता विरोधी अपराध पर गंभीर प्रतिक्रिया दर्शाएं और इस तरह के कृत्यों के विदित व निहित समर्थकों को अपमानित करें।