11 मार्च 2019 - 14:15
संयुक्त राष्ट्र संघ शरणार्थी उच्चायुक्त  ने वर्ष 2018 में यमन के विरुद्ध सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के युद्ध में आम नागरिकों

सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार विरोधी धर्म प्रचारक शैख़ औदह की रिहाई के लिए कैंपेन चला कर उनकी सज़ा के बारे में विभिन्न सवाल खड़े कर दिए हैं।

सऊदी अरब के प्रख्यात वहाबी धर्म प्रचारक शैख़ सलमान अलऔदह की तुरंत रिहाई के लिए एक ट्वीटर हैंडल से जैसे ही ट्वीट किया गया, वैसे ही लोगों ने उनकी रिहाई के लिए "औदह ख़तरे में हैं" के नाम से एक हैशटैग के माध्यम से निरंतर ट्वीट करना शुरू कर दिया और यह हैश टैग ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा। औदह को सऊदी सरकार ने डेढ़ साल पहले गिरफ़्तार कर लिया था और अब इस प्रकार की सूचनाएं आ रही हैं कि उन्हें जल्द ही मौत के घाट उतार दिया जाएगा। सऊदी अरब में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को इस्तेमाल करने की वजह से जेल में डाले गए लोगों की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली एक संस्था ने एक बयान जारी करके बताया है कि शैख़ औदह को काल कोठरी में रखा गया है और उन्हें दवाएं भी नहीं दी जा रही हैं जिसके कारण उनकी शारीरिक स्थिति चिंताजनक हो गई है।

 

एक यूज़र ने ट्वीट किया है कि झूठे आरोपों के चलते शैख़ औदह को मौत की सज़ा दिए जाने से पहले सभी को उनकी मुक्ति के लिए क़दम उठाना चाहिए और सऊदी अधिकारियों की ओर से बंदियों के अधिकारों के हनन पर चुप नहीं बैठना चाहिए। अलजज़ीरा टीवी चैलन के पूर्व प्रमुख यासिर अबू हेलाला ने लिखा है कि किस शैतान ने मुहम्मद बिन सलमान के समक्ष शैख़ औदह के मृत्युदंड को अच्छा बना कर पेश किया है? या यह कि ये विरोधियों के ख़िलाफ़ एक मानसिक युद्ध है जो न्याय व क़ानून रहित तानाशाही की छाया में छेड़ा गया है?

 

सऊदी अरब से बाहर रहने शैख़ सलमान अलऔदह के पुत्र अब्दुल्लाह ने कुछ दिन पहले कहा थ कि उनके पिता के ख़िलाफ़ मुक़द्दमे की कार्यवाही एेसी स्थिति में चलाई जा रही है जब उन्हें सुनवाई में उपस्थित भी नहीं होने दिया गया है। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब के अटाॅर्नी जनरल ने ट्वीटर के माध्यम से लोगों को उकसाने और सांस्कृतिक गतिविधियों के आरोप में उन्हें मौत की सज़ा दिए जाने की मांग की है। ज्ञात रहे कि सऊदी अरब के प्रख्यात धर्म प्रचारक शैख़ सलमान अलऔदह को सितम्बर 2017 में बीस अन्य धर्मगुरुओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था जिनमें से अधिकतर धर्म प्रचारक थे। अनेक अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी कई बार मांग की है कि सऊदी सरकार यह बताए कि शैख़ औदह को किस स्थान पर रखा गया है और साथ ही उनके वकीलों व परिजनों को उनसे मिलने की अनुमति दी जाए। सऊदी सरकार ने अब तक यह मांग स्वीकार नहीं की है।