अमेरिका प्रतिबंधों को दोबारा ईरान पर लगाकर व्यवहारिक रूप से परमाणु समझौते को खत्म करने की चेष्टा में है। अमेरिका के विपरीत दूसरे देशों और गुट चार धन एक का मानना है कि परमाणु समझौते के खत्म करने से सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे अमेरिकी दृष्टिकोण के विरोधी हैं।
गुट चार धन एक का मानना है कि परमाणु समझौता एक बहुपक्षीय समझौता है और वह दूसरे दूसरे विवादों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदर्श भी बन सकता है।
इसी तरह इस गुट के सदस्यों का मानना है कि कूटनीति के क्षेत्र में परमाणु समझौता बहुत बड़ी उपलब्धि है और सुरक्षा परिषद ने भी प्रस्ताव नंबर 2231 पारित करके सर्वसम्मति से इस समझौते की पुष्टि की है।
यह ऐसी स्थिति में है जब परमाणु समझौते से निकल जाने के लिए गुट चार धन एक पर अमेरिकी दबाव में पहले से अधिक वृद्धि हो गयी है विशेषकर यूरोपीय संघ द्वारा ईरान से व्यापारिक लेन- देन के लिए वित्तीय व्यवस्था इन्सटेक्स बनाये जाने के बाद इसमें और गति आ गयी है।
अमेरिकी इच्छा के वितरीत चार धन एक गुट के सदस्य देशों का मानना है कि परमाणु समझौते को बाकी रखा जाना चाहिये और वियना बैठक में संयुक्त आयोग ने एक विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि प्रतिबंधों को समाप्त करना परमाणु समझौते का एक महत्पूर्ण भाग है।
इसी प्रकार संयुक्त आयोग के सदस्य देशों ने पूरी तरह इस समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने पर बल दिया है। इसी प्रकार संयुक्त आयोग के सदस्य देशों ने परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी की निष्पक्षता और ईरान के साथ व्यापारिक लेन-देने हेतु इंसटेक्स बनाये जाने की यूरोरपीय देशों के प्रयास की भी प्रशंसा की है।
ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते पर जब से अमल आरंभ हुआ है तब से अमेरिका सदैव इस समझौते के पालन में आना- कानी से काम लेता रहा और यही नहीं उसने परमाणु समझौते के आर्थिक लाभों से ईरान को वंचित करने के लिए इसमें विघ्न उत्पन्न करता रहा है।
बहरहाल गुट चार धन एक सदस्य देशों ने एक बार फिर परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने और ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के नकारात्मक परिणामों के कम करने पर बल दिया है।