4 मार्च 2019 - 16:28
अमरीका का पतन!

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अली शमख़ानी ने तेहरान में एक सम्मेलन में कहा कि दुनिया में अमरीका की शक्ति क्षीण हो रही है।

उन्होंने इसे एक सच्चाई बताते हुए कहा कि यद्यपि अमरीका और क्षेत्र के रूढ़ीवादी देशों ने आतंकवादी तत्वों व किराए के टट्टुओं की सेवा ली ताकि इस्लामी प्रतिरोध को ख़त्म कर दें लेकिन प्रतिरोध के जियालों, सीरियाई सेना, इराक़ी स्वयंसेवी बल हश्दुशशअबी, यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन और पवित्र रौज़ों के रक्षकों ने यह दर्शा दिया कि पश्चिम दुनिया का ध्रुव नहीं है और अमरीका की शक्ति से बना हुआ काग़ज़ का पुतला बड़ी आसानी से गिराया जा सकता है।

आज जब क्षेत्र में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश की हार से प्रतिरोध के मोर्चे की स्थिति मज़बूत हुयी है, अमरीका क्षेत्र में अपनी और इस्राईल की नीतियों की विफलता से ध्यान हटाने की कोशिश में लगा है। पिछले 10 साल में क्षेत्र में जंग की आग भड़काने वाले ज़ायोनी शासन को हिज़्बुल्लाह और फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधी गुटों के मुक़ाबले में 4 जंगों में हार का मज़ा मिला है। लेबनान और ग़ज़्ज़ा में प्रतिरोध के मोर्चे के सामने इस शासन की कई बार हार से एक बात स्पष्ट हो गयी कि इस्राईल और उसका मुख्य समर्थक अमरीका किस हद तक भेद्य हैं।

इस प्रतिरोध और सफलताओं के दो परिणाम सामने आए हैं। एक यह कि इस्राईल की हार मिथक नहीं बल्कि एक सच्चाई है। दूसरा परिणाम जो और अधिक अहम है वह यह कि क्षेत्र में अमरीका की शक्ति के क्षीण होने के लक्ष्ण ज़ाहिर हो चुके हैं। जैसा कि इसी बात को स्पष्ट करने के लिए इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने वॉर्सा में अमरीका द्वारा ईरान विरोधी प्रस्तावित बैठक का उल्लेख किया जो बिना किसी परिणाम के ख़त्म हो गयी।