4 मार्च 2019 - 15:29
ईरान को अपने आंतरिक और विदेशी मामलों में किसी अनुमति लेने की ज़रूरत नहींः

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने कहा कि ईरान किसी की शर्त स्वीकार करने वाला देश नहीं है और वह आंतरिक और विदेशी मामलों में किसी से अनुमति नहीं लेता।

उन्होंने सोमवार को साप्ताहिक प्रेस सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार के बारे में ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने के लिए यूरोपी संघ की ओर से पेश की गयी शर्तों के हवाले से प्रकाशित होने वाले कुछ समाचारों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान का क्षेत्रीय प्रभाव जिसके बारे में अमरीका और ज़ायोनी शासन षड्यंत्र कर रहे हैं, एक जनप्रभाव और व्यक्तिगत प्रभाव है और इसका सरकार से कोई वास्ता नहीं है। 

श्री बहराम क़ासिमी ने यह बयान करते हुए कि ईरान का अध्यात्मिक प्रभाव ऐसा नहीं है जो एक दो या की मांग पर कम या ज़्यादा हो जाए, कहा कि ईरान अपनी आवश्यक स्वाधीनता के साथ अपनी क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय नीति को आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की पाकिस्तान यात्रा और ईरान-पाकिस्तान संबंधों के बारे में कहा कि तेहरान-इस्लामाबाद के संबंध प्राचीन हैं और दोनों ही पड़ोसी देश, अपने संबंधों में अच्छे पड़ोसी होने का ख़याल रखते हैं।

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने सीस्तान व बलोचिस्तान के आतंकी हमले के बाद ईरान पाकिस्तान संबंधों में पैदा होने वाले मतभेदों के बारे में कहा कि इन सबके बावजूद ईरान ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि वह पूरी गंभीरता के साथ दोनों देश की सीमाओं की रक्षा के विषय पर कार्यवाही करे और इस बारे में दोनों देशों के बीच संपर्क जारी रहना चाहिए।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने भारत-पाक विवाद और इस संबंध में ईरान के दृष्टिकोण के बारे में कहा कि ईरान ने हमेशा से ही यह माना है कि अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनों के दृष्टिगत भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव, दोनों मे से किसी के भी हक़ में नहीं है और दोनों पक्षों से अपील की है कि वे आपसी मतभेदों को वार्ता द्वारा हल करें।

श्री बहराम क़ासिमी ने कहा कि ईरान, भारत और पाकिस्तान के बीच मित्रता पैदा करने के लिए जो भी सहायता बन सकेगी करने को तैयार है।

उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद की हालिया तेहरान यात्रा के बारे में कहा कि इस प्रकार की यात्राओं के बारे में जो राजनैतिक व सुरक्षा कारणों से पहले से बताई नहीं जातीं, इसीलिए उनके आने और जाने में सही रास्ता चुना गया और जिनको इस यात्रा के बारे में पता होना था, उन्हें पता चल गया था। 

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने ब्रिटेन सरकार की ओर से लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह का नाम ब्लैक लिस्ट किए जाने के बारे में कहा कि यदि हम फ़राख़ दिली का प्रदर्शन करें तो हमें समझ में आता कि ब्रिटेन को इसमें रणनैतिक ग़लती हुई है। उनका कहना था कि हिज़्बुल्लाह, लेबनान की संसद और  इस देश की अखंडता का महत्वपूर्ण भाग है जिसने पिछले वर्षों के दौरान आतंकवादी तत्वों से मुक़ाबला करके यूरोप सहित दूसरे क्षेत्रों में आतंकवाद के विस्तार पर लगाम लगाई।