3 मार्च 2019 - 16:19
ओआईसी के घोषणापत्र पर ईरान भड़का, देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान के तीनों द्वीपों तुंबू बुज़ुर्ग, तुंबू कूचिक और बू मूसा को ईरान का अटूट भाग क़रार देते हुए कहा है कि ईरान की संप्रभुता, ऐतिहासिक और प्राचीन है और इससे किसी भी प्रकार से पीछे नहीं हटेगा।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने संयुक्त अरब इमारात में ओआईसी के विदेशमंत्रियों की बैठक की समाप्ति पर जारी होने वाले घोषणापत्र पर कहा कि अंतिम दिन समान प्रक्रिया के आनुसार दस्तावेज़ों का जाएज़ा लिया जाता है और फिर उनकी मंज़ूरी दी जाती है किन्तु संयुक्त अरब इमारात के विदेशमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों के विरुद्ध घोषणापत्र को अबूधाबी घोषणापत्र के रूप में पेश किया और उपस्थितगणों की राय लेने और उनके दृष्टिकोणों के बिना घोषणापत्र थोपने और दुरुपयोग करने का प्रयास किया गया जिससे ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने विफल बना दिया।

ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि घोषणापत्र के विषय वस्तु में जो संयुक्त अरब इमारात की ओर से पेश हुआ था ईरानी द्वीपों बू मूसा, तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग के बारे में निराधार और मनगढ़ंत दावे किए गये थे जिस पर ईरानी प्रतिनिधि मंडल ने आपत्ति जताते हुए बैठक का बहिष्कार किया जिसके कारण बैठक में हड़कंप मच गया और दूसरे देशों के प्रतिनिधिमंडल ने भी बैठक छोड़ दी और बैठक समाप्त हो गयी जिसके कारण संयुक्त अरब इमारात को अपने ग़ैर क़ानूनी लक्ष्यों की प्राप्ति में विफलता का मुंह देखना पड़ा।

दूसरी ओर ओआईसी ने बैठक की समाप्ति पर अपने घोषणापत्र में कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के बिना दक्षिणी एशिया में शांति संभव नहीं है। ओआईसी के विदेशमंत्रियों की 46वीं दो दिवसीय बैठक की समाप्ति के बाद जारी होने वाले घोषणापत्र में भारत-पाक तनाव पर चिंता व्यक्त की गयी और दोनों देशों से यह कहा गया कि किसी ऐसी कार्यवाही से बचें जो दक्षिणी एशिया की स्थिति और क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए ख़तरा होगा।

बयान में कहा गय है कि भारत, पाकिस्तान के साथ कश्मीर मुद्दे सहित समस्त विवादों को परस्पर वार्ता द्वारा हल करे। ओआईसी ने कहा कि दोनों देश वर्तमान संकट पर बातचीत और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की स्थापना के लिए तनव कम करें। ओआईसी ने कहा कि यमन विवाद का राजनैतिक हल तलाश करना भी समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।