2 मार्च 2019 - 16:51
इल्म, अख़लाक़ और दीनदारी के साथ होना चाहिए- आयतुल्लाह ख़ामेनई

दुश्मन यूनिवर्सिटीज़ में इंक़ेलाबी विचारधारा और दीनी फ़िक्र, उनकी तय की हुई रेड लाईन के तोड़े जाने और इंक़ेलाबी नारों के साथ इल्म और टेक्नोलॉजी का परचम बुलंद होने से भयभीत हैं और इसके मुक़ाबले की साज़िश पर भारी रक़म ख़र्च कर रहे हैं।

ईरान की यूनिवर्सिटीज़ और बड़े बड़े तालीमी सेंटर के डायरेक्टर, प्रोफ़ेसर और लेक्चरर ने एक मौक़े पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई से मुलाक़ात की जिसमें आपने हमेशा की तरह कुछ नसीहतें इस तरह फ़रमाईं।
इस्लामी इंक़ेलाब के रहबर ने इस मुलाक़ात में तीसरी दुनिया के देशों के लिए पश्चिमी देशों के साम्राज्यवाद की साज़िशों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि उनकी साज़िश यह थी कि यूनिवर्सिटीज़ में पश्चिमी देशों की जीवन शैली और विचारधारा के मुताबिक़ देशों के उच्च और ज़िम्मेदार अधिकारियों की तरबियत की जाए लेकिन ईरान में यूनिवर्सिटीज़ के स्टूडेंट्स की दीनी और इस्लामी विचारधारा की गहराई की वजह से उन्हें अपसी साज़िश को अमल में लाने के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
आपने उपनिवेशवाद और ऐटम बम को इल्म के ग़लत रास्ते पर जाने के ऐतिहासिक नतीजे में शुमार किया और फ़रमाया कि हमेशा इस बात का ख़्याल रखना चाहिए कि इल्म, अख़लाक़ और दीनदारी से अलग न होने पाए।
इस्लामी इंक़ेलाब के रहबर आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ईरान में देश के नौजवान वैज्ञानिकों द्वारा यूरेनियम की 20% बढ़ौतरी का ज़िक्र करते हुए कहा कि तेहरान रय ऐक्टर का जिसका मक़सद न्यू क्लेयर मेडिसिन की तैयारी है, ईंधन ख़त्म हो रहा था और पश्चिमी देशों ने ईंधन देने के लिए बुरी तरह अपमानित कर देने वाली शर्तें रखीं तो हमारे मोमिन और नौजवान वैज्ञानिकों ने अपनी ऊर्जा और टेक्नोलॉजी का इस्लेमाल किया और उन्होंने रात दिन मेहनत कर के देश की 20% यूरेनियम जिसकी ज़रूरत थी उन्होंने पूरी कर दी।
आपने फ़रमाया कि ईरान, यूरेनियम की 99% तक की बढ़ौतरी का काम बहुत आसानी से अंजाम दे सकता है, इस्लामी इंक़ेलाब के रहबर ने कहा कि ऐटम के सिलसिले में पश्चिमी देशों की बौखलाहट की वजह भी यही है, हालांकि अगर उन्होंने हमें 20% यूरेनियम दे दिया होता तो हम 20% की बढ़ौतरी का काम भी अंजाम न दे पाते।
आयतुल्लाह ख़ामेनई ने परमाणु वार्ता के दौरान पश्चिमी देशों की शर्तों का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हर तरह के दबाव और पाबंदियों के बावजूद इस्लामी गणतंत्र ईरान तरक़्क़ी के रास्ते पर पूरी तरह चल रहा है, आपने इस बात का ज़िक्र करते हुए कि अमेरिका ने विज्ञान के क्षेत्र में तरक़्क़ी ईरान से 140 साल पहले शुरू की फ़रमाया कि जिस चीज़ ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है वह हमारी विज्ञान क्षेत्र में तेज़ी से तरक़्क़ी करना है, जैसाकि विश्व स्तर पर अधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान किया गया है कि ईरान में विज्ञान क्षेत्र की तरक़्क़ी की स्पीड दुनिया के बाक़ी देशों को देखते हुए कई गुना ज़्यादा है।
ईरानी इंक़ेलाब के रहबर आयतुल्लाह ख़ामेनई ने फ़रमाया कि आज यूनिवर्सिटीज़ और उसके स्टूडेंट्स साम्राज्वादी साज़िशों के निशाने पर हैं, आपने फ़रमाया हमारे दुश्मन यूनिवर्सिटीज़ में इंक़ेलाबी विचारधारा और दीनी फ़िक्र, उनकी तय की हुई रेड लाईन के तोड़े जाने और इंक़ेलाबी नारों के साथ इल्म और टेक्नोलॉजी का परचम बुलंद होने से भयभीत हैं और इसके मुक़ाबले की साज़िश पर भारी रक़म ख़र्च कर रहे हैं।
आपने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि मौजूदा दौर में साम्राज्यवादी हथकंडे बदल गए हैं फ़रमाया कि साम्राज्वादी ताक़तें अब यह कोशिशें कर रही हैं कि देशों के बुद्धिमान और ऐक्टिव लोगों कि फ़िक्रों को इस तरह बदल दें कि वह उनके मक़सद के लिए काम करें।
इस्लामी इंक़ेलाब के रहबर ने विश्व स्तर पर ईरान के सम्मान का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि ख़ुद को कम आंकना बहुत ख़तरनाक बीमारी है जबकि पूरा विश्व इस बात को स्वीकार करता है कि ईराम एक सम्मानजनक और पावर फ़ुल देश है और दुश्मन इस बात से नाराज़ है कि उसको ईरान के अंदर पैर जमाने का मौक़ा नहीं मिल रहा है।