यहां हम सोशल मीडिया पर उनकी कुछ हिट पोस्टों पर एक नज़र डालेंगे।
सोमवार को ज़रीफ़ ने इंस्टाग्राम पर अपने इस्तीफ़े के घोषणा की, जिसने लोगों को आश्चर्य में डाल दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल में होने वाली किसी भी तरह की कोताही के लिए माफ़ी भी मांगी।
मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ 2013 से ईरान के विदेश मंत्री के रूप में सक्रिय थे। 2015 में ईरान और दुनिया की 6 बड़ी शक्तियों के बीच हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते के लिए होने वाली वार्ता में उन्होंने ईरानी वार्ताकार दल का नेतृत्व भी किया।
हालांकि मई 2018 में ट्रम्प प्रशासन के एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकलने की घोषणा के बाद, ज़रीफ़ और अमरीकी अधिकारियों के बीच सोशल मीडिया पर शब्दों का एक युद्ध शुरू हो गया।
उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति और उनके अधिकारियों की धमकियों का जवाब देने के लिए ट्रम्प के पसंदीदा प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया को ही अपना हथियार बनाया।
जून 2018 में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के एक धमकी भरे बयान में ज़रीफ़ ने ईरान के स्थान पर अमरीका को रख दिया और एक पुराने मुहावरे, जिन लोगों के घर शीशे के होते हैं वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते, का इस्तेमाल किया।
जुलाई में ट्रम्प ने ईरान के ख़िलाफ़ वहीं आक्रामक भाषा इस्तेमाल करनी चाही जो वह उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करते रहे हैं। ट्रम्प ने ट्वीट किया, ईरान को कभी भी अमरीका को धमकी नहीं देनी चाहिए, ईरान ने अगर ऐसा किया तो उसे ऐसा सबक़ सिखाया जाएगा कि इतिहास याद रखेगा।
ज़रीफ़ ने जवाबी हमला करते हुए ट्वीट किया, रंग हमें प्रभावित नहीं करते, ईरान ने पिछली सहस्राब्दियों के दौरान कई साम्राज्यों को गिरते देखा है, जिसमें स्वयं भी शामिल है, जो कुछ देशों के पूरे इतिहास से भी अधिक समय तक बाक़ी रहा।
अगस्त में ज़रीफ़ ने ट्रम्प के इस ट्वीट को ट्रोल किया, जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति ने विश्व शांति की बात की थी।
ज़रीफ़ ने जवाब दिया, विदेशी संबंध कोई सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं है, और यह कोई पहली बार नहीं है कि एक झगड़ालू व्यक्ति विश्व शांति के लिए युद्ध छेड़ने की बात कर रहा है।
जब सऊदी क्राउन प्रिंस जमाल ख़ाशुक़जी की निर्मम हत्या में फंसते नज़र आए तो ट्रम्प ने अपने दोस्त को बचाने के लिए इस अपराध का आरोप ईरान के सिर मढ़ने की कोशिश की। ज़रीफ़ ने ट्वीटर पर इसका जवाब देते हुए कहा, किसी को कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर केलिफ़ोर्निया के जंगलों में लगी आग के लिए ईरान पर आरोप लगाया जाए।
फ़रवरी में ईरान जब इस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा था, ट्रम्प ने ट्वीट करके विश्व में ईरान को आतंकवाद का मुख्या बताया। ज़रीफ़ ने जवाबी हमला करते हुए कहा, यह वाशिंगटन है जो तानाशाहों, क़साईयों और आतंकवादियों का समर्थन करता रहा है, जिन्होंने हमारे इलाक़े में तबाही फैलाई है।