25 फ़रवरी 2019 - 17:05
स्वाधीनता का अर्थ दुनिया से कट कर रहना नहीं हैः ज़रीफ़

इस्लामी क्रांति का एक मुख्य नारा विदेश नीति में स्वाधीनता है। विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा है कि स्वाधीनता का अर्थ यह है कि दुनिया से अलग न रहें और दुनिया और विश्व के दूसरे देशों के साथ लेन- देन करें।

हालिया दो दशकों में क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों ने दर्शा दिया है कि ईरान की स्वतंत्र व स्वाधीन नीति ने ऐसी संभावना उत्पन्न कर दी है जो वैश्विक शक्तियों की इच्छाओं से बढ़कर है। ईरान ने सीरिया, इराक और लेबनान सहित क्षेत्र में उत्पन्न हुए संकटों से मुकाबले में अपनी रचनात्मक भूमिका सिद्ध कर दी है।

सीरिया में जो युद्ध काफी कम हो गया है, आतंकवादी गुट दाइश को नियंत्रित किया जा चुका है और काफी सीमा तक क्षेत्र में जो शांति व सुरक्षा का स्थापित हो चुकी है वह ईरान, रूस और तुर्की के मध्य रचनात्मक सहकारिता का परिणाम है।

क्षेत्र में ईरान की जो रचनात्मक भूमिका है अमेरिका, सऊदी अरब और इस्राईल द्वारा उसके विरोध के बावजूद क्षेत्रीय परिवर्तनों के समाधान बहुपक्षवाद की ओर बढ़ रहे हैं। राजनीतिक टीकाकार इस परिवर्तन को अमेरिका के एकपक्षवाद के मुकाबले में संतुलन उत्पन्न करने की दिशा में महत्वपूर्ण कारक समझ रहे हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अभी हाल ही में कहा था कि आज वह देश जिसमें अमेरिका की कम से कम भूमिका भी नहीं है, इस्लामी गणतंत्र ईरान है और इसका अर्थ अमेरिका की पराजय है।

अभी हाल ही में जो वार्सा बैठक हुई थी उसमें भी अमेरिका को विफलता का सामना हुआ था और अमेरिका अपनी विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है और यह दिखाने की चेष्टा कर रहा है कि ईरान के खिलाफ वह अकेला नहीं है परंतु विभिन्न कारणों से उसकी यह चाल भी विफल हो गयी है।

ईरान के विदेशमंत्री ने इस संबंध में कहा है कि परमाणु समझौते से निकल जाने से अमेरिका को जिस चीज़ से हाथ धोना पड़ा है वह एक स्ट्रैटेजिक पराजय थी। ईरान के खिलाफ सुरक्षा परिषद के 6 प्रस्ताव समाप्त हो गये।

अमेरिका ने एक वर्ष के अंदर चार बार इस पराजय की भरपाई की कोशिश की परंतु इसमें उसे पराजय का सामना करना पड़ा। अमेरिकी पोलैंड गये परंतु वहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी परंतु अमेरिका फिर प्रयास करेगा यह बहुपक्षवाद के महत्व का सूचक है।

बहरहाल कुल मिलाकर कहना चाहिये कि पूरी दुनिया में अमेरिका की जो धाक व शक्ति थी दिन- प्रतिदिन वह अपने पतन की ओर अग्रसर है और चार दशक पहले जो अमेरिका था आज वह उससे भी अधिक कमज़ोर हो चुका है।