क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के संबंध में ईरान की नीति संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र के अनुसार है और वह इसी परिप्रेक्ष्य में काम कर रहा है।
उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा के सचिव एडमिरल अली शमख़ानी ने एक साक्षात्कार में ईरान और क्षेत्र से संबंधित होने वाले परिवर्तनों के बारे में कहा कि आतंकवाद से मुकाबला और क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के लिए प्रयास करना ईरान की अटल नीति है।
इसी आधार पर ईरान इन समस्त वर्षों में आतंकवाद से मुकाबले में अग्रणी रहा है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान का मानना है कि किसी विदेशी शक्ति व तत्व की उपस्थिति के बिना आपसी सहकारिता से क्षेत्र की शांति व सुरक्षा को सुनिश्चित बनाया जा सकता है और अगर कोई समस्या होगी तो उसका भी समाधान किया जा सकता है।
ईरान का यह दृष्टिकोण कभी भी अमेरिका और क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वालों को पसंद नहीं आयेगा।
इस आधार पर अमेरिका, इस्राईल और सऊदी अरब इस दृष्टिकोण के विरोधी हैं। क्षेत्र में ईरान की जो रचनात्मक व सरारात्मक भूमिका है अमेरिका विभिन्न बहानों से उसमें विघ्न उत्पन्न करने और उसे नकारात्मक दर्शाने की चेष्टा में रहता है।
अभी हाल ही में जो वार्सा बैठक हुई थी उसका आधार ईरान विरोध था और अमेरिका को ज्ञात है कि इस बैठक में उसके प्रयास विफल हो गये परंतु वह यह दिखाने का प्रयास कर रहा है कि ईरान की दुश्मनी में वह अकेला नहीं है।
उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव कहते हैं कि सही है कि अमेरिका की नियत ईरानी राष्ट्र विरोधी गठबंधन बनाना है परंतु इस संबंध में क्षेत्र के देशों का दृष्टिकोण वाइट हाउस के अधिकारियों के दृष्टिकोणों से मेल नहीं खाता है।
अलबत्ता इस्लामी गणतंत्र ईरान ने सदैव दुश्मन की सैनिक धमकी को गम्भीरता से लिया है और इसी वजह से हम प्रतिरोधक क्षमता से सम्पन्न होने पर आग्रह कर रहे हैं चाहे वह मिसाइल के क्षेत्र में हो या एअर डिफेन्स के क्षेत्र में।
आज ईरान सैनिक क्षेत्र में हर चुनौती व धमकी का करारा जवाब दे सकता है और इस चीज़ को ट्रंप और दूसरे अमेरिकी अधिकारी बहुत अच्छी तरह जानते हैं और यह बात इस्राईल के लिए पूरी तरह स्पष्ट है और चूंकि वे जानते हैं कि ईरान से नहीं लड़ सकते तो उन्होंने धमकी की आवाज़ ऊंची कर दी है। ट्रंप की यही शैली है वह लड़ने वाले नहीं हैं लड़ना न पड़े इसलिए वह धमकी देते हैं।