20 फ़रवरी 2019 - 17:38
क़त्ले आम के सुबूत मिटाने में क्यों व्यस्त है इस्राईल? दैरे यासीन और कफ़र क़ासिम में हुए भयानक जनसंहार के तथ्य आज तक ख़ुफ़िया क्

इस्राईली मीडिया में यह बात सामने आई है कि इस्राईली सुरक्षा एजेंसियां सरकारी आरकाइव में जनसंहार से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने की कोशिशों में व्यस्त हैं।

इस आरकाइव में 3 लाख से अधिक फ़ाइलें उन जनसंहारों से संबंधित हैं जो फ़िलिस्तीन की धरती पर इस्राईली एजेंसियों के हाथों अंजाम दिए गए। इस्राईली टीकाकार आसाफ़ शालीव ने अपने लेख में लिखा है कि इन फ़ाइलों में 70 से 200 साल पुराने जनसंहारों के साक्ष्य हैं मगर इस्राईल की अब भी यह कोशिश है कि इन आपराधिक घटनाओं से जुड़े साक्ष्य सामने न आने पाएं। कैलीफ़ोर्निया में रहने वाले शालीव ने कहा कि वर्ष 2018 के ग्रीष्मकाल में इस्राईली आर्काइव ने एक एल्बम जारी कर दिया था जिसमें उन अपराधों से जुड़े चित्र थे जो 100 साल से अधिक पहले हुए थे। दो हज़ार से अधिक साक्ष्य इस प्रकार हैं जिनका संबंध अवैध शासन इस्राईल की स्थापना से है।

शालीव का मानना है कि इन दस्तावेज़ों में नाम, तारीख़ें, उनके असली सूत्र सब कुछ हैं जो अब तक गुप्त हैं इसलिए कि इस्राईली अधिकारियों को आज भी डर है कि यदि यह राज़ खुल गए तो इस्राईली अधिकारियों की हक़ीक़त लोगों के सामने आ जाएगी जो बेहद भयानक है।

टीकाकार का कहना है कि इन गुप्त साक्ष्यों में एक का नाम पारकर रिपोर्ट है जिसका संबंध 1821 से है। दो हज़ार साक्ष्य हैं जिनका संबंध 1948 से है। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि आज तक इस्राईल इन गुप्त साक्ष्यों को सामने आने से रोक रही है।

इस्राईली टीकाकार का कहना है कि इस्राईली आर्काइव में सबसे महत्वपूर्ण फ़ाइलें 9 अप्रैल 1948 को होने वाले दैर यासीन जनसंकार तथा 29 अकतूबर 1956 को होने वाले कफ़र क़ासिम जनसंहार की हैं। यह जनसंहार इस्राईली सुरक्षा बलों ने किए।

कुछ संगठन इस कोशिश में लगे हुए हैं कि इस्राईली आर्काइव में मौजूद राज़ बाहर आए ताकि यह समझा जा सके कि इस्राईल ने किस प्रकार की कार्यवाहियां की हैं।

इस्राईल की गतिविधियों के बारे में यह बात सामने आ चुकी है कि वह अपने हितों के लिए ख़ुद अपने लोगों की टार्गेट किलिंग करवाता रहा है ताकि इसका आरोप फ़िलिस्तीनियों तथा अन्य अरब देशों पर लगे। इस्राईल ने कई बार विदेशों में अपने दूतावासों पर ख़ुद हमले करवाए हैं ताकि इन हमलों का आरोप वह मुस्लिम देशों पर लगाए और यूरोपीय देशों की ओर से इन मुस्लिम देशों पर दबाव डलवा सके।

इस्राईल ने हनी ट्रैप के रूप में महिला जासूसों का भी प्रयोग किया है जिन्होंने अरब नेताओं से बहुत से राज़ चुराए और उन्हें ख़ुद अरब जगत के ख़िलाफ़ काम करने पर तैयार कर लिया।

स्थिति यह हो गई कि अरब देशों में यह विचार आम हो गया कि यदि इस्राईली इंटैलीजेन्स कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई ताक़त नहीं रोक सकती।

मगर इस समय हालात बदले हुए हैं। ईरान की अगुवाई में पश्चिमी एशिया में नया मोर्चा अस्तित्व में आया है जिसे प्रतिरोधक मोर्चा कहा जाता है जिसके बारे में इस्राईल में रहने वालों को भी यक़ीन है कि यह ताक़तवर मोर्चा इस्राईल का सर्वनाश कर देने की क्षमता रखता है।

इस्राईल के भीतर और बाहर यह विचार मौजूद है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ सक्रिया ताक़तें अपना दायरा बढ़ाती जा रही हैं और इस्राईल को घुटन का आभास होने लगा है।

इन हालात में यदि इस्राईली आर्काइव में मौजूद राज़ बाहर आते हैं तो इस्राईल के लिए परिस्थितियां और भी कठोर हो जाएंगी। कारण  यह है कि जिन अरब देशों से दोस्ती के लिए इस समय इस्राईल प्रयासरत हैं वहां के कुछ अधिकारियों के बारे में कहा जाता है कि उन्हें इस्राईल ने ही सत्ता के भीतर पहुंचाया है अब यह राज़ यदि खुल जाता है तो इस्राईल की योजनाओं पर पानी फिर जाएगा।