20 फ़रवरी 2019 - 17:26
पादरियों का कृत्य सामने आया, ननों ने आख़िरकार ज़बान खोल ही दी

जारी महीने फ़रवरी के शुरु में रोमन कैथोलिक के धार्मिक नेता पोप फ़्रांसिस ने स्वीकार किया था कि पादरियों ने ननों को यौन उत्पीड़न का निशाना बनाया और उन्हें यौन बंधक भी बनाए रखा।

पोप फ्रांसिस ने मध्यपूर्व के दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि चर्च ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास कर रहा है। पोप फ़्रांसिस का कहना था कि उनके दृष्टगत पोप बेन्डिक्ट को ननों का वह स्थान बंद करने के लिए मजबूर किया गया था जहां पदारी उन्हें यौन उत्पीड़न का निशाना बनाते थे।

और अब इस स्थान पर यौन उत्पीड़न का निशाना बनाई गयी महिलाएं सामने आई हैं और उन्होंने पहली बार अपने साथ होने वाली अनुचित बर्ताव पर खुलकर बात की है।

सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में पदारियों की ओर से यौन उत्पीड़न का शिकार बनाई गयी महिलाओं की कहानियां प्रकाशित की गयी हैं।  सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में पदारियों की ओर से कई साल तक यौन उत्पीड़न का निशाना बनाई जाने वाली महिलाओं का हवाला देते हुए लिखा है कि अभी तक उन्हें क़ानूनी इन्साफ़ नहीं मिल सका।

एक दश्क से अधिक समय तक यौन दुराचार और अनुचित रवैये का निशाना बनने वाली महिला लूसी ने स्वयं पर हुए अत्याचारों के बारे में बताया। लूसी को पहली बार 18 वर्ष की आयु में स्वीट्ज़रलैंड में स्थित ननों के बनाए गये कम्युनिटी आफ़ सेन्ट जोहन सेन्टर में यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। लूसी के अनुसार वह कई महीने तक पादरी के अनुचित रवैये को सहन करती हीं क्योंकि वह पादरी के मुक़ाबले में कमज़ोर थीं।