12 फ़रवरी 2019 - 15:44
इस्राईल के मुंह पर अंतर्राष्ट्रीय तमांचा, हिज़्बुल्लाह के बारे में ज़ायोनी शासन के आरोपों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने ख

इस्राईल राजनैतिक और कूटनैतिक मंचों पर दिन रात इस कोशिश में लगा रहता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों की ओर से लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन को आतंकी संगठन घोषित करवा दे।

संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल के राजूदत डैनी डैनोन ने लेबनान की सीमा पर इस्राईल के सुरंगें खोजने के ड्रामे के साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रयास तेज़ कर दिए थे कि इस संस्था के सदस्य देश हिज़्बुल्लाह को आतंकी संगठन घोषित कर दें।

इस्राईल ने बहुत सीना पीटा कि उसने लेबनान की सीमा पर चार सुरंगे खोज ली हैं जिन्हें हिज़्बुल्लाह अलजलील के इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने के लिए खोदा था।

इस्राईली अख़बार यदीऊत अहारोनो ने तेल अबीब में उच्च राजनैतिक व कूटनैतिक सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि इस्राईल के विदेश मंत्रालय ने कई देशों के राजदूतों से मुलाक़ात के लिए अपने प्रतिनिधियों को भेजा और इन राजदूतों को सीमा पर ले जाकर वह सुरंगें दिखाईं जिन्हें खोज लेने का इस्राईल दावा कर रहा था। इस्राईली अधिकारियों और विशेष रूप से इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने ख़ूब शोर मचाया कि हिज़्बुल्लाह ने इस्राईल पर युद्ध थोपने के लिए यह सुरंगें खोदी थीं। संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईली राजदूत डैनन जो नेतनयाहू के बहुत क़रीबी समझते हैं इस पूरे ड्रामे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

इस्राईल को यह आशा थी कि कुछ अरब देशों और अमरीका की तरह दूसरे देश भी हिज़्बुल्लाह को आतंकी संगठन घोषित करने के लिए तैयार हो जाएंगे तो हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ एलायंस बनाने का रास्ता खुलेगा क्योंकि इस्राईल को यह यक़ीन है कि वह अपने बलबूते पर हिज़्बुल्लाह का सामना नहीं कर सकेगा।

अमरीका और इस्राईल की चिंता इस समय इसलिए और भी बढ़ गई है कि लेबनान में जो नई सरकार बनी है उसमें हिज़्बुल्लाह की व्यापक भागीदारी है और इसका अनुमान कुछ महीने पहले चुनावों के परिणाम आने के साथ ही हो गया था। अमरीका और इस्राईल दोनों मिलकर यूरोपीय देशों को इस बात के लिए तैयार कर रहे हैं कि वह हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ कठोर रुख अपनाएं और उसे आतंकी संगठन मान लें। अमरीका ने लेबनान में अपनी गतिविधियां तेज़ कर दी हैं कि किसी तरह नई सरकार भंग हो जाए।

संयुक्त राष्ट्र में इस्राईली राजदूत का कहना है कि हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध लड़ाई इस्राईल के लिए बहुत अधिक महत्व रखती है और हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ अमरीका और इस्राईल के संयुक्त अभियान के निशाने पर वास्तव में ईरान है इसलिए कि हिज़्बुल्लाह ईरान की ही पैदावार है और ईरान से उसे आर्थिक और सामरिक सहायता मिलती है।

डैनन को अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन की तरह कट्टरपंथी व्यक्ति माना जाता है। जान बोल्टन भी संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका के राजदूत रह चुके हैं।

हिज़्बुल्लाह को बदनाम करने और आतंकी संगठन घोषित करवाने की अमरीका और इस्राईल की सघन कोशिशों के बावजूद इस्राईली सूत्रों का कहना है कि हालात का रुख़ इस्राईल की इच्छा के अनुरूप नहीं है क्योंकि लेबनान से मिलने वाली सीमा का दौरा करने वाले कई राजदूतों ने इस्राईलियों से साफ़ साफ़ कह दिया कि हम हिज़्बुल्लाह को आतंकी संगठन नहीं मान सकते क्योंकि इसके कई कारण हैं। सूत्रों ने इन कारणों के बारे में कुछ नहीं बताया। इस तरह इस्राईल जो हिज़्बुल्लाह को बदनाम करने की कोशिश में था उसे अंतर्राष्ट्रीय तमाचा पड़ा है।

इस्राईल की अध्ययन रिपोर्टों में हिज्बुल्लाह को इस्राईल का पहले नंबर का शत्रु घोषित किया जा रहा है और यह भी कहा गया है कि हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह इस्राईल के खिलाफ़ गोलान हाइट्स के इलाक़े से नया मोर्चा खोलने वाले हैं जिसके बाद इस इलाक़े में इस्राईल की वही दुर्गत होगी जो दक्षिण लेबनान में मई 2000 में वहां से इस्राईल के बाहर निकलने से पहले थी।

दक्षिणी लेबनान से जिस दिन इस्राईल अपने सैनिकों को बाहर निकालने पर मजबूर हुआ था उस दिन को हिज़्बुल्लाह विजय दिवस के रूप में मनाता है और हर साल इसी उपलक्ष्य में समारोह आयोजित किए जाते हैं।